शिमला। हिमाचल में सीमेंट के मनमाने ढंग से रेट बढ़ाने से नाराज प्रदेश सरकार ने सीमेंट कंपनियों पर शिकंजा कस दिया है। पिछले 6 महीनों से राज्य में सीमेंट की कीमतें बढ़ रही हैं। सरकार को लग रहा है कि सीमेंट उद्योग राज्य के संसाधन इस्तेमाल कर यहां की जनता को महंगा सीमेंट बेच रहे हैं। इसी के चलते सरकार ने अब सीमेंट कंपनियों के खिलाफ कड़े फैसला लेने शुरू कर दिए हैं।
सरकार ने फैसला लिया है कि राज्य में बड़े उद्योगों को दी गई इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में छूट सीमेंट कारखानों पर लागू नहीं होगी। इन्हें पूरी ड्यूटी चुकानी होगी। राज्य में इस समय तीन मुख्य सीमेंट प्लांट अंबुजा, एसीसी और जेपी कंपनी के हैं। क्षमता से अधिक उत्पादन के लिए जेपी कंपनी के बागा सीमेंट प्लांट को सरकार ने नोटिस दे दिया है। अर्की के बागा स्थित इस प्लांट में 2.05 मीट्रिक टन क्षमता के मुकाबले 3.46 मीट्रिक टन क्लींकर तैयार हो रहा है। सिंगल विंडो सब कमेटी ने प्लांट का निरीक्षण करने पर पाया कि कंपनी के पास आज तक बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता की अनुमति नहीं है। यह बात सामने आने के बाद सरकार ने इस प्लांट के एनर्जी ऑडिट के आदेश भी दे दिए हैं।
दूसरी ओर दाड़लाघाट स्थित अंबुजा सीमेंट उद्योग ने साथ लगती सरकारी जमीन को लेने के लिए सरकार को आवेदन किया था। सरकार ने यह आवेदन भी खारिज कर दिया है। इससे पूर्व सरकार सीमेंट प्लांट वाले क्षेत्रों से पिछड़ी पंचायत का दर्जा वापस ले चुकी है। इस दर्जे के आधार पर सीमेेंट उद्योग सरकार से टैक्स छूट ले रहे थे।
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उद्योग मंत्री ने खुद की समीक्षा
सचिवालय में सोमवार शाम को उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें उद्योग के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजली बोर्ड, आबकारी एवं कराधान और खनन विभाग के अफसर शामिल हुए। इसमें तय हुआ कि ऐसे मामलों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस तरह के उल्लंघन पर बिजली बोर्ड के पास पावर सप्लाई काटने का भी अधिकार है। हालांकि आधिकारिक तौर पर उद्योग मंत्री ने इतना बताया कि हम सभी संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। 3-4 दिनों में दोबारा बैठक होगी।