शिमला। आम चुनावों में लहर का असर हिमाचल प्रदेश के नतीजों पर भी पड़ता है। जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति सहानुभूति लहर से प्रदेश के चुनाव नतीजे प्रभावित हुए हैं। ऐसे में देखने की बात यह है कि शुक्रवार को जब दोपहर में प्रदेश की चारों सीटों के नतीजे घोषित होंगे, क्या उस समय नरेंद्र मोदी लहर का असर पड़ेगा या फिर सूबे के मतदाता कुछ अलग हटकर जनादेश देंगे।
हिमाचल के मतदाता राष्ट्रीय मुद्दों को जल्दी से भांप लेते हैं। उसी के अनुरूप वोटर भी करते आए हैं। पिछले साढ़े तीन दशक के चुनाव नतीजे इस बात की पुष्टि करते हैं। वर्ष 1977 में जय प्रकाश नारायण के आंदोलन के समय जनता पार्टी के खाते में प्रदेश की जनता ने चारों सीटें दे दी थीं। जनता पार्टी की सरकार गिरने के बाद 1980 में चुनाव हुए, जिसमें प्रदेश के वोटरों ने कांग्रेस की झोली में चारों सीटें डाल दीं। 1984 में जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई, उस समय भी प्रदेश की जनता ने कांग्रेस के चारों प्रत्याशियों को जिताकर संसद में भेजा। इसके बाद 1989 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान हिमाचल ने भाजपा के तीन सांसदों को जिताकर दिल्ली भेजा। 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन और 1998 में 13 महीने की सरकार गिरने के बाद हिमाचल ने लगातार भाजपा का साथ दिया। ऐसे में सवाल यह है कि जब देश भर में मोदी की लहर है, उस स्थिति में क्या हिमाचल में इसका असर पड़ेगा या नहीं। यह तसवीर शुक्रवार को दोपहर 12 बजे तक साफ हो जाएगी।
लहरों तबदील हुई सीटों में
सन लहर सीट
1977 जेपी आंदोलन 04 (जनता पार्टी)
1980 इंदिरा गांधी 04 कांग्रेस
1984 इंदिरा की हत्या 04 कांग्रेस
1989 राम मंदिर 03 भाजपा
1998 अटल बिहारी वाजपेयी 03 भाजपा
1999 अटल बिहारी वाजपेयी 04 भाजपा और हिविकां
2014 मोदी लहर ?