बिलासपुर/शिमला। दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने की संभावनाओं के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सक्रिय हो गया है। आरएसएस ने बुधावार को पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल समेत हिमाचल के चारों प्रत्याशियों की बिलासपुर में खुफिया बैठक बुलाई। इस बैठक में नई सरकर में हिमाचल की भूमिका और आगे की रणनीति तय की गई। बैठक से साफ हो गया कि केन्द्र में अगर मोदी सरकार बनी तो नई सरकार में आरएसएस की कितनी अहम भूमिका होगी।
बिलासपुर के सरस्वती विद्या मंदिर में बुधवार सुबह हुई इस गुप्त बैठक की भनक किसी को नहीं थी। बैठक में आरएसएस ने चुन चुन कर भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों को बुलाया था। इसमें भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती, संगठन महामंत्री पवन राणा, चारों लोससभा सीटों के प्रत्याशी अनुराग ठाकुर, शांता कुमार, वीरेंद्र कश्यप और रामस्वरूप शर्मा, महामंत्री डा. राजीव बिंदल, रणधीर शर्मा, विपिन परमार, पूर्व अध्यक्ष जयराम ठाकुर समेत भाजपा के तकरीबन 30 नेता शामिल हुए। चारों संसदीय क्षेत्रों के प्रभारी भी इसमें शामिल थे। जिन्हें बुलाया गया वह सभी नेता इस बैठक में शामिल थे। अधिकतर बाहर रहने वाले अनुराग ठाकुर भी इस बैठक में आना नहीं भूले। बैठक में एग्जिट पोल के नतीजों पर खुशी जताई गई। सूत्र बताते हैं कि हिमाचल कोटे से केन्द्र में मंत्री कौन बनेगा इस बारे में चर्चा नहीं हुई। लेकिन इस बारे में संघ की रिपोर्ट मायने रखेगी। संघ की ओर से उत्तर क्षेत्र प्रमुख प्रेम कुमार, प्रांत प्रमुुख बनवीर, प्रांत कार्यवाह बीरसिंह रांगड़ा आदि बैठक में उपस्थित हुए।
हालांकि संघ और भाजपा नेताओं ने इसे समीक्षा बैठक का नाम दिया। उनका कहना था कि चुनाव से पहले और बाद भाजपा में ऐसी बैठकें होती रही हैं। इस बैठक में भी लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान के अनुभव सभी नेताओं ने साझा किए। संघ ने भी कहा कि पार्टी ने इस बार का चुनाव एकजुट होकर लड़ा है। सूत्र ने बताया कि नतीजों के बाद की रणनीति पर भी चर्चा हुई है। बैठक में लोकसभा सीटवार चर्चा जरूर हुई है।