शिमला। हिमाचल में सार्वजनिक उपक्रमों यानी बोर्ड-निगमों के हजारों कर्मचारियों को पेंशन देने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी एसोसिएशन से जवाब मांगा है। एसोसिएशन को 14 जुलाई से पहले ये जवाब देना होगा। हिमाचल हाईकोर्ट ने दिसंबर 2013 में बोर्ड-निगमों के कर्मचारियों को 29 अक्तूबर 1999 की अधिसूचना के अनुसार पेंशन देने के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस आरके अग्रवाल की खंडपीठ के सामने राज्य सरकार ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने प्रभावित कर्मचारियों के पक्ष को सुनने के बाद फैसला दिया और इसमें वित्तीय मजबूरियों को नजरअंदाज किया गया। सरकार ने अक्तूबर 1999 में पेंशन स्कीम लागू जरूर की थी, लेकिन 12 दिसंबर 2004 को इसे विदड्रा कर लिया था, क्योंकि राज्य के 22 बोर्ड-निगमों में से अधिकांश घाटे में हैं। कर्मचारी एसोसिएशन ने स्कीम वापस लेने के 5 साल बाद हाईकोर्ट में केस किया, जिसे सुना ही नहीं जाना चाहिए था। इस फैसले को लागू करने के लिए 1000 करोड़ चाहिए, जो सरकार के पास नहीं हैं। सरकार की ओर से इस फैसले पर रोक लगाने की मांग भी की गई। इस पर खंडपीठ ने संबंधित कर्मचारी एसोसिएशन को जवाब दायर करने को कहा। वर्तमान में बोर्ड-निगमों में 43 हजार कर्मचारी हैं।