शिमला। सरकारी भूमि पर कब्जा करने के आरोप में पूर्व डीजीपी डीएस मन्हास के मामले की शुक्रवार को नगर निगम के सहायक आयुक्त कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। तहसीलदार की व्यस्तता के चलते सुनवाई शनिवार तक टल गई है। अब शनिवार को तहसीलदार और कानूनगो के सहायक आयुक्त कोर्ट में बयान दर्ज होंगे। 22 अप्रैल को राजस्व विभाग के पटवारी और नगर निगम के लीज इंस्पेक्टर ने पूर्व डीजीपी पर नवबहार में सरकारी भूमि कब्जाने का आरोप लगाया है। इस मामले में सरकारी अफसर गवाह बनाए गए हैं। पूर्व डीजीपी डीएस मन्हास के भवन की राजस्व विभाग की टीम ने पैमाइश की है। निगम के मुताबिक पूर्व डीजीपी ने 959 वर्ग मीटर की बाउंड्री वॉल नगर निगम की भूमि पर बनाई है। नौ अप्रैल को पूर्व डीजीपी की ओर से निगम की पैमाइश पर जवाब दिया गया है। 12 मार्च को सहायक आयुक्त के कोर्ट में पूर्व डीजीपी के गवाह पेश हुए थे। मार्च माह में नगर निगम ने डीएस मन्हास को भवन के पैमाइश की रिपोर्ट सौंपी थी।
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अवैध निर्माण का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
नवबहार में अवैध निर्माण करने के मामले में घिरे राज्य के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (डीजीपी) डीएस मन्हास का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह के कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी कर अपनी रिपोर्ट को हाईकोर्ट को सौंप दी है। अब हाईकोर्ट इस मामले में फैसला सुनाएगा। 28 अप्रैल को आयुक्त कोर्ट में डीएस मन्हास के गवाह ने बयान दिए हैं। डीएस मन्हास की ओर से इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में आवेदन किया गया था। जिसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त को अपनी सुनवाई पूरी करने के बाद सूचित करने के आदेश दिए थे।
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अक्तूबर से चल रही है मामले की सुनवाई
पूर्व डीजीपी के भवन निर्माण का मामला बीते साल अक्तूबर माह से सुर्खियों में है। नगर निगम और जिला प्रशासन ने अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच की है। पूर्व डीजीपी का बहुमंजिला भवन नवबहार के समीप है। आरोप है कि पूर्व डीजीपी ने स्वीकृत नक्शे के बाहर भवन का निर्माण किया है। उधर, विजिलेंस में भी मन्हास के खिलाफ अवैध निर्माण का मामला दर्ज है।