शिमला। नगर निगम कोर्ट में अवैध निर्माण मामलों की सुनवाई में लोग नहीं आ रहे हैं। राज्य सरकार ने फरवरी माह में शहर में अवैध भवनों को नियमित करने का फैसला लिया था लेकिन, मार्च में चुनाव आचार संहिता लगने से मामला लटक गया है। ऐसे में लोग अब रिटेंशन पॉलिसी आने के इंतजार में बैठ गए हैं। मार्च माह से पचास से साठ प्रतिशत लोगों ने अवैध निर्माण के मामलों में आयुक्त कोर्ट में हाजिरी नहीं लगाई है। शुक्रवार को आयुक्त अमरजीत सिंह के कोर्ट में अवैध निर्माण के 65 मामलों की सुनवाई रखी गई थी लेकिन, सिर्फ 20 लोगों ने ही कोर्ट में हाजिरी भरी है। निगम सूत्र बताते हैं कि अधिकांश लोग दफ्तर आकर ही लौट जाते हैं। कोर्ट में सुनवाई के बजाए लोग रिटेंशन पॉलिसी के आने का इंतजार करना बेहतर समझ रहे हैं।
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आठ हजार से अधिक अवैध निर्माण
शहर में आठ हजार से अधिक अवैध निर्माण हैं। वर्तमान में यह लोग बिना पानी, बिजली और सीवरेज कनेक्शनों के जीवनयापन कर रहे हैं। दस प्रतिशत से अधिक डेविएशन होने के चलते नगर निगम ने इन भवनों के नक्शे पास नहीं किए है। टुटू, कसुम्पटी, मल्याणा, चम्याणा, न्यू शिमला, छोटा शिमला, खलीणी और ढली में इन मकानों की संख्या अधिक है। मुख्य शहर में भी अवैध निर्माण के सैकड़ों मामले हैं।
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राज्य की कांग्रेस सरकार ने लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से ठीक पहले भवन नियमित करने का तीर छोड़कर जनता को लुभाने का प्रयास किया है। चुनाव निपटने के बाद ही इस बाबत अब अंतिम फैसला होगा। इससे पूर्व निगम चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने रिटेंशन पालिसी की अधिसूचना जारी की थी।
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इस तरह रेगुलर होंगे भवन
कैटेगिरी नंबर 1 - ऐसे भवन जिनके निर्माण के लिए अनुमति ली गई है, पर बनाते समय डेविएशन की गई है। इनके लिए अलग से डेविएशन चार्जिज प्रस्तावित किए गए हैं, जिनका भुगतान करना होगा।
कैटेगिरी नंबर 2 - ऐसे भवन जिनका निर्माण बिना अनुमति से किया गया है, परंतु उनको नियमों के अनुसार बनाया गया है। ऐसे भवनों को नियमित करने के लिए कंपाउंडिंग शुल्क का प्रावधान किया गया है।
कैटेगिरी नंबर 3 - ऐसे भवन जिनका निर्माण बिना अनुमति से किया गया है और नियमों का भी उल्लंघन किया है। इनके लिए डेविएशन चार्जिज और कंपाउंडिंग शुल्क दोनों का भुगतान करना होगा।