शिमला। नवबहार में सरकारी भूमि पर कब्जा करने के आरोप में घिरे राज्य के पूर्व डीजीपी डीएस मन्हास को नगर निगम से राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को सहायक आयुक्त कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान डीएस मन्हास की ओर से पैमाइश रिपोर्ट पर आपत्तियां देने के लिए पंद्रह दिन देने की मांग की गई। सहायक आयुक्त नरेश ठाकुर के कोर्ट ने लंबी तारीख देने से साफ इनकार करते हुए जवाब देने के लिए सिर्फ पांच दिन दिए हैं। अब नौ अप्रैल को मामले की सुनवाई होगी।
पूर्व डीजीपी डीएस मन्हास को भवन के पैमाइश की रिपोर्ट 31 मार्च को सौंपी गई थी। शुक्रवार को इस बाबत पूर्व डीजीपी को अपना जवाब दायर करना था लेकिन, शुक्रवार को कोर्ट में पेश हुए वकीलों ने जवाब देने के पंद्रह दिन की मोहलत मांगी। पूर्व डीजीपी डीएस मन्हास के भवन की राजस्व विभाग की टीम ने पैमाइश की है। तहसीलदार शिमला शहरी की अगुवाई में गई टीम ने फीते से जमीन नापी है। पूर्व डीजीपी पर नवबहार स्थित मकान के पास सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप है। निगम के मुताबिक पूर्व डीजीपी ने 959 वर्ग मीटर की बाउंड्री वॉल नगर निगम की भूमि पर बनाई है। पब्लिक प्रीमिसिस एक्ट 1971 एक्ट में पूर्व डीजीपी पर कार्रवाई की जा रही है। सहायक आयुक्त कोर्ट में इस बाबत मामला चल रहा है। 12 मार्च को सहायक आयुक्त के कोर्ट में पूर्व डीजीपी के गवाह पेश हुए थे। निगम ने तीनों सरकारी अधिकारियों के बयान दर्ज किए हैं।