शिमला। जेपी कंपनी किन्नौर जिला स्थित अपने दोनों बिजली प्रोजेक्टों को सरकार के साथ सभी मसले सुलझाने के बाद ही बेच सकेगी। कड़छम वांगतू और बास्पा प्रोजेक्ट खरीदने वाली दुबई की टाका कंपनी ने प्रदेश सरकार को आश्वस्त किया है कि इन प्रोजेक्टों को तभी टेकओवर किया जाएगा, जब जेपी कंपनी सरकार के साथ अपने सभी कमिटमेंट्स पूरी करेगी। इसके बाद जेपी कंपनी ने फसलों को हुए नुकसान के मुआवजे के रूप में 13 करोड़ भी डीसी किन्नौर के पास जमा करवा दिए हैं। शुक्रवार को कंपनी ने एक पत्र से इसकी जानकारी प्रधान सचिव ऊर्जा को दी। हालांकि, सरकार ने जेपी कंपनी को झटका देते हुए आईटीआई ऊरनी और शोल्टू में बनाए अस्पताल की लागत को लाडा फंड में जोड़ने से इनकार कर दिया है। इतनी धनराशि कंपनी को लाडा फंड में अतिरिक्त रूप से जमा करवानी होगी। कंपनी के साथ चल रहे विवाद निपटाने को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, प्रधान सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी और जेपी कंपनी के साथ हुई बातचीत के बाद ये तय हुआ है।
हालांकि, पर्यावरण प्रबंधन योजना के तहत 15.35 करोड़ के बजट को 2009 में ही लाडा में जोड़ दिया गया था। प्रधान सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जेपी कंपनी की सभी शर्तें पूरी करने के बाद ही नई कंपनी हाइड्रो प्रोजेक्ट को टेकओवर करेगी। इसे सख्ती से अनुपालन कराया जाएगा।
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फ्री बिजली पर फैसला जल्द
कड़छम वांगतू प्रोजेक्ट में एग्रीमेंट से ज्यादा बिजली बनाने का मसला अब भी जेपी कंपनी के साथ लंबित है। कंपनी से 900 मेगावाट बिजली का समझौता हुआ था, लेकिन कंपनी ने इस प्रोजेक्ट से 1100 मेगावाट बिजली बनाई है। अतिरिक्त बिजली के कारण इससे आने वाले मुफ्त बिजली राज्य सरकार को नहीं मिली है। ऊर्जा सचिव कहते हैं कि सीए से ऑडिट फाइनल होने के बाद इस पर जल्द फैसला होगा।