शिमला। हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ शिक्षा विभाग के नए फरमान के बाद भड़क गया है। हाल ही में शिक्षा विभाग की ओर से बिलासपुर और मंडी जिला के उपनिदेशकों को पत्र जारी कर 2004 से एसीआर मांगी है। अब तक 2012 से एसीआर मांगी जा रही थी। इस नए आदेश के बाद संघ ने विभाग खिलाफ हाईकोर्ट जाने का मन बना लिया है। 4-9-14 की फिक्सेशन के मामले को लेकर संघ ने शीघ्र दोनों निदेशकों के खिलाफ 15 दिन का नोटिस भेजने का फैसला किया है।
संघ का आरोप है कि विभाग 5 मार्च की बैठक में वर्क एंड कंडक्ट के तहत 4-9-14 की सुविधा देने की बात पर सहमत हो गया था। अब फिर से एसीआर मांगी जा रही है, जबकि विभाग को एसीआर दी जा चुकी है। जिनके गुम होने का आरोप विभाग के एसीआर सेल पर लगा है। ऐेसे में जो एसीआर एक बार ही बनती है, उसे फिर से कैसे शिक्षा निदेशकों को उपलब्ध करवाया जाए। प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव संजय कपूर ने बताया कि 4-9-14 को लेकर उच्चतर और प्रारंभिक शिक्षा निदेशकों के साथ कई बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आया है। टीचरों की एसीआर शिक्षा निदेशालयों में गुम हुई है। इसका खामियाजा टीचरों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे में कोर्ट जाने का सिवाय दूसरा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि 15 हजार टीजीटी, 10 हजार लेक्चरर, 8 हजार जेबीटी और करीब इतने ही सीएंडबी वर्ग के शिक्षक सीधे प्रभावित हो रहे हैं। संघ ने कहा कि 2012 से जो वित्तीय लाभ शिक्षकों को मिलना था, वह अब वे कोर्ट से विद इंट्रस्ट लेने के लिए लड़ाई लडे़ंगे।