शिमला। 31 मार्च आने वाला है और शिक्षा विभाग के 55 करोड़ रुपये अभी दिल्ली में अटके पड़े हैं। इसी वित्त वर्ष में ये धनराशि मिल जाए, इसलिए विभाग ने भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय को दोबारा पत्र भेजा है। यह राशि सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) और राजकीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) के तहत मिलनी है। वित्त वर्ष 2013-14 के लिए इन दोनों प्रोजेक्टों के तहत करीब 55 करोड़ की राशि नहीं मिली है। इसमें एसएसए के 215 करोड़ में से 32 करोड़ रुपये नहीं मिले हैं। आरएमएसए के तहत 47 करोड़ रुपये में से 23 करोड़ आना बाकी हैं। वित्त वर्ष का अंतिम महीना समाप्त होने को है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश में आरटीई को लागू करना, टीचर्स की ट्रेनिंग, अक्षम बच्चों की पढ़ाई और प्रदान करने के अलावा कई तरह के कार्यक्रम चल रहे हैं। इसके अलावा राजकीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत छात्राओं को सेल्फ डिफेंस, सबको समान शिक्षा, स्कूलों की मैपिंग, स्कूल प्रबंधन समितियों का संचालन, शिक्षकों के प्रशिक्षण और दूरदराज इलाकों में माध्यमिक पाठशालाएं खोलने जैसे कार्य शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार उक्त दोनों स्कीमों के तहत मिली अधिकतर राशि खर्च की जा चुकी है। एसएसए के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर घनश्याम चंद ने बताया कि बची हुई राशि जारी करने के संबंध में मानव संसाधन मंत्रालय को पत्र लिख कर भेजा है। उम्मीद है इसी सप्ताह तक बची हुई राशि की किस्त जारी हो जाएगी।