शिमला। जियोलॉजिकल सर्वे करवाकर कृष्णानगर में भवनों के धंसने का मूल कारण खोजा जाएगा। फौरी तौर पर प्रभावित परिवारों को जिला प्रशासन की ओर से राहत राशि आवंटित की जाएगी और लोगों के ठहरने का बंदोबस्त स्कूल व सामुदायिक भवन में किया जाएगा। यह जानकारी निगम महापौर संजय चौहान ने रविवार को कृष्णानगर में प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने के बाद दी।
संजय चौहान ने बताया कि नगर निगम जिला प्रशासन के साथ संयुक्त प्रयास कर प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने की हर संभव मदद करेगा। उन्हाेंने बताया कि निगम अधिकारियों की शुरुआती जांच रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि कृष्णानगर के नीचे की पूरी चट्टान धंस रही है, जिस कारण भवनों में दरारें आई हैं। तीस साल पहले भी कृष्णानगर का एक बड़ा हिस्सा दरक गया था और कई भवन जमींदोज हो गए थे। 2011 में निर्माणाधीन स्लाटर हाउस के पीछे भी जमीन धंसने के कारण कई ढारे ढह गए थे। अब एक बार फिर कृष्णानगर की जमीन धंसने लगी है तो समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत महसूस होने लगी है।
शहर के मलबे पर बसा है कृष्णानगर
करीब दो सौ साल पहले जब शिमला शहर बसा, उस समय माल रोड, रिज और लक्कड़ बाजार में भवन निर्माण के दौरान मलबा रिवाली और कृष्णानगर की ओर फेंका गया। इसी मलबे पर कृष्णानगर में भवनों का निर्माण हो गया है। पहले यहां ढारे थे जिसके चलते जमीन धंसने जैसी कोई समस्या पेश नहीं आई। लेकिन अब यहां कंकरीट के बहुमंजिला भवन बन गए हैं, जमीन धंसना शुरू हो गई है।
किराये पर भी नहीं मिल रहे मकान
कृष्णानगर में भवन धंसने से प्रभावित लोगों को किराये के मकान नहीं मिल रहे हैं। स्थानीय निवासी जगदीश कुमार का कहना है कि किराये पर मकान नहीं मिल रहे, मजबूरन गिर रहे मकान में ही रहना पड़ रहा है।
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‘ नगर निगम और जिला प्रशासन मिलकर समस्या के समाधान का प्रयास करेगा। जियोलॉजिकल सर्वे के माध्यम से जमीन धंसने के कारणों का पता लगाया जाएगा। राजीव आवास योजना के तहत कृष्णानगर के लोगों को पक्के मकान दिए जाएंगे।’
- संजय चौहान, मेयर
नगर निगम शिमला
‘ जिला प्रशासन की ओर से सोमवार को कृष्णानगर में प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया जाएगा। प्रभावित लोगों को फौरी तौर पर जिला प्रशासन की ओर से मदद दी जाएगी। जियोलॉजिकल सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर समस्या का स्थायी समाधान ढूंढा जाएगा।’
- दिनेश मल्होत्रा
उपायुक्त शिमला