शिमला। वर्क टू रूल के पहले ही दिन राजधानी सहित जिला भर में मुसाफिरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बस स्टैंड में सवारियां बसों के इंतजार में घंटों खड़ी रहीं लेकिन निगम की बसें नहीं आईं। एचआरटीसी बसें न चलने के कारण निजी बसों में भी भारी ओवरलोडिंग रही। एचआरटीसी कर्मचारियों के वर्क टू रूल पर उतरने से परिवहन निगम की हवा निकल गई है।
एचआरटीसी, समन्वय समिति दोनों के अपने अपने दावे
शिमला। वर्क टू रूल के कारण एचआरटीसी के सैकड़ों रूट फेल हुए और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिला में कितने रूट फेल हुए इसे लेकर एचआरटीसी के अधिकारियों व कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अपने अपने दावे रहे।
डिपो एचआरटीसी समन्वय समिति
तारादेवी 04 28
शिमला (ग्रामीण) 04 62
रोहड़ू 04 32
रिकांगपिओ 04 26
रामपुर 27 45
शिमला (लोकल) 55 105
विकास नगर को रात 10 बजे आखिरी बस
न्यू शिमला सेक्टर के तहत विकास नगर के लिए रात 10 तक बसों की आवाजाही जारी रखी गई। हालांकि बसों की फ्रिक्वेंसी बहुत कम रही बावजूद इसके 10 बजे आखिरी बस भेजी गई।
संजौली से 4 नाइट बसें नहीं गईं
संजौली सेक्टर से रवाना होने वाली 8 में से 4 रूटों पर बसें रवाना नहीं हो सकी। गुम्मा, मूल कोटी, सेहनल, सैंव रूट पर बसें रवाना नहीं हो पाईं।
आईएसबीटी को चली शटल बसें
ओल्ड बस स्टैंड से आईएसबीटी के लिए चलने वाली शटल बस सर्विस चालू रखी गई। हालांकि रूट पर चलाई जाने वाली अतिरिक्त बसें कम संख्या में चलीं, जिस कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।