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World Poetry Day 2024: महिलाओं पर आधारित प्रसिद्ध कविताएं, पढ़कर नारी शक्ति को करेंगे सलाम

Tue, 19 Mar 2024 06:26 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हर साल 21 मार्च को विश्व कविता दिवस के रूप में मनाते हैं। कई ऐसी कविताएं लिखी गईं जो महिलाओं के जीवन को बहुत सुंदर और सशक्त तरीके से प्रदर्शित करती हैं। 
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World Poetry Day 2024 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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World Poetry Day 2024 :  कम और प्रभावी शब्दों में कही गई बात कविता बन जाती है। कविताएं दिल के करीब होती है। किसी बात को कविता के रूप में कहना, एक प्रभावी तरीका हो सकता है। इसलिए कह सकते हैं कि कविता में एक शक्ति होती है। इतिहास इस शक्ति का गवाह भी है। कविताओं ने सत्ता हिला दी, कविताओं ने दिल करीब ला दिए। कविताओं की इसी शक्ति और महत्व से सभी को अवगत कराने के लिए विश्व कविता दिवस मनाया जाता है। हर साल 21 मार्च को विश्व कविता दिवस के रूप में मनाते हैं। कई ऐसी कविताएं लिखी गईं जो महिलाओं के जीवन को बहुत सुंदर और सशक्त तरीके से प्रदर्शित करती हैं। यहां महिलाओं के लिए सबसे खूबसूरत कविताओं में से कुछ का संकलन दिया जा रहा है, जो उनके धैर्य, प्रेम और संवेदनशील स्वभाव का वर्णन करती हैं। विश्व कविता दिवस के मौके पर महिलाओं पर आधारित कविताएं पढ़िए।

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बदली
दूर रहकर भी
जान जाती है
धरती की प्यास
और आकाश के अनुशासन को
तोड़कर बरस पड़ती है
जैसे दुधमुँहे बच्चे की
माँ के स्तनों से
टपकने लगता है दूध
बच्चे की भूख के समय...

रंजना जायसवाल

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अखबार बेचती लड़की
अखबार बेच रही है या खबर बेच रही है
यह मैं नहीं जानती
लेकिन मुझे पता है कि वह
रोटी के लिए अपनी आवाज़ बेच रही है

निर्मला पुतुल

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सौंदर्य का आश्चर्यलोक


बचपन में घंटों माँ को निहारा करती थी

मुझे वह बेहद सुंदर लगती थी

उसके हाथ कोमल गुलाबी फूलों की तरह थे

पाँव खरगोश के पांव जैसे

उसकी आंखें सदा सपनों से सराबोर दिखतीं

उसके लंबे काले बाल हर पल उलझाए रखते मुझे

याद है सबसे ज़्यादा मैं उसके बालों से ही खेला करती थी

उसे गूँथती फिर खोलती थी

जब माँ नहा-धोकर तैयार होती

साड़ी बांधना

मेरे लिए वह विश्व का सुंदरतम दृश्य होता

जिसके रंगों और ख़ुशबुओं में मैं यूँ खो जाती

जैसे कोई एलिस आश्चर्य लोक में

जब मैं थोड़ी बड़ी हुई

मुझे अपनी बड़ी बहन दुनिया की सबसे सुंदर

लड़की लगने लगी

उसकी लगभग सोने जैसी देह

अपनी दमक से संसार को भरती

उसे भी मैं घंटों देखती जब वह तैयार होती

नहा-धोकर लगभग माँ की तरह ही

अपने लंबे बालों को सुखाती संवारती बाँधती

उसकी आँखें माँ की आँखों से भी ज़्यादा

स्वप्निल दिखतीं

अब मुझे अपनी बेटियाँ इतनी सुंदर लगती हैं

कि मैं उनके पाँवों को चूमती रहती हूँ

मन ही मन ख़ुश होती हूँ

कि एक स्त्री हूँ

और घिरी हूँ इतने सौंदर्य से। 

सविता सिंह

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