जब एक माँ ठान लेती है, तो बेटियां इतिहास रच देती हैं।, ये कहावत एक मां बेटी की जोड़ी पर एकदम सटीक बैठती है। इस पंक्ति को सच कर दिखाया है तन्वी शर्मा और उनकी माँ मीना शर्मा ने। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, मातृत्व और जुनून की मिसाल है। 16 साल की उम्र में एशियन चैंपियनशिप गोल्ड मेडल जीतने वाली तन्वी, आज दुनिया की नंबर-1 जूनियर बैडमिंटन शटलर हैं। लेकिन इस सफलता की असल जड़ें वहां हैं, जहां एक माँ ने अपने सपनों से पहले बेटियों के सपनों को रखा।
कौन हैं तन्वी शर्मा ?
16 साल की तन्वी शर्मा पंजाब के होशियारपुर की रहने वाली हैं। तन्वी विश्व बैमिंटन रैंकिंग में शीर्ष 50 में शामिल हैं, वहीं वह जूनियर वर्ल्ड नंबर 1 बैडमिंटर खिलाड़ी हैं। तन्वी के पिता का नाम विकास शर्मा है जो कि होशियारपुर में एडीसी कार्यालय में अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वहीं उनकी मां मीना शर्मा तन्वी की कोच भी हैं।
माँ ने बैडमिंटन सीखा ताकि बेटियों को सिखा सकें
हालांकि मीना शर्मा ने खुद बैडमिंटन खेला भी नहीं था। लेकिन जब उन्होंने देखा कि उनकी बेटी खेल में रुचि ले रही है तो उन्होंने कोच बनने की ट्रेनिंग ली। उन्होंने उम्र, हालात और सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए खुद को बदला ताकि बेटियों को बेहतर भविष्य दे सकें।
आज उनकी बेटियां खासकर तन्वी, विश्वस्तर पर भारत का नाम रोशन कर रही हैं।
तन्वी की मां मीना ने उनके खेल को आकार देने और उसकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिणाम स्वरूप तन्वी ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां अपने नाम की।
तन्वी ने इतिहास रचा
साल 2025 में हुए US Open Super 300 में तन्वी ने फाइनल तक का सफर तय किया और BWF World Tour Final में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। उन्होंने यूक्रेन की टॉप खिलाड़ी पोलिना बुह्रोवा को सीधे सेट में हराकर पूरी दुनिया को दिखा दिया कि भारतीय बेटियां किसी से कम नहीं।
मां बनीं रोल माॅडल
मीना ने साबित किया कि माँ सिर्फ जन्म नहीं देती, भविष्य भी बनाती है। उन्होंने बेटियों को सपनों पर यकीन करना सिखाया, हर हार में सबक और हर जीत में संयम देना सिखाया। यह जीत सिर्फ तन्वी की नहीं, हर उस माँ की है जो अपनी बेटी के लिए खड़ी होती है