हरियाणा के हिसार की रहने वाली वीणा कुमारी बीते दो दशकों से लगातार उन महिलाओं और बच्चियों के लिए उम्मीद की किरण बनी हुई हैं, जो किसी कारणवश अपने परिवार से बिछड़ गई हैं या समाज द्वारा उपेक्षित कर दी गई हैं। वीणा बताती हैं कि बचपन से ही स्कूल आते-जाते समय वह ऐसी महिलाओं को देखा करती थीं, जो सड़क किनारे रहती थीं। वे इधर-उधर से खाने का जुगाड़ करतीं और हमेशा एक ही कपड़े में दिखती थीं। वीणा के मन में उनके लिए कुछ करने का विचार आता।
वह बताती हैं, “बचपन से ही मेरे भीतर समाज के जटिल मुद्दों को समझने और उन्हें हल करने की क्षमता रही है, लेकिन बच्चों की भावनाओं को हमेशा ही सहानूभूति समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसलिए जैसे ही मैं उनके लिए कुछ करने योग्य हुई, मैंने इस क्षेत्र में कार्य करना शुरू कर दिया।
मेरे पास कोई बड़ी संस्था तो थी नहीं, न ही आर्थिक संसाधन थे और न ही प्रचार-प्रसार की कोई सुविधा थी। फिर भी मैंने ठान लिया कि मैं अपने स्तर पर समाज की उपेक्षित महिलाओं की मदद करूंगी। मैंने अपने सीमित संसाधनों और निजी खर्चे पर ऐसे लोगों की खोजबीन शुरू की, जो मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक रूप से टूट चुके थे।”
वीणा न सिर्फ उन्हें उनके परिवार से मिलवाती हैं, बल्कि उनका पुनर्वास भी सुनिश्चित करती हैं। उन्हें भोजन, वस्त्र, शिक्षा सामग्री और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा भी उपलब्ध कराती हैं। शिक्षा से वंचित बच्चों के लिए किताबें, कपड़े और कॉपियां खरीदना उनके कार्य का हिस्सा बन चुका है। कई बार उन्होंने बेघर महिलाओं के लिए अस्थायी निवास और काम की व्यवस्था भी की है। इस नेक कार्य के दौरान उन्होंने हरियाणा ही नहीं, बल्कि गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और अन्य राज्यों में भी महिलाओं को उनके घर तक पहुंचाया।
वह खुद बसों, ट्रेनों या अन्य माध्यमों से पीड़ितों को उनके घर तक लेकर जाती हैं या पुलिस की मदद से उन्हें वापस पहुंचाती हैं। उनका काम सिर्फ भूले-बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिलवाने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने ऐसे मामलों में भी हस्तक्षेप किया, जहां महिलाएं घरेलू हिंसा, मानसिक तनाव या आर्थिक तंगी का शिकार थीं। वीणा ने पुलिस और प्रशासन से लगातार संपर्क बनाए रखा और इसी सहयोग के बल पर उन्होंने अब तक सैकड़ों महिलाओं और बच्चियों को उनके परिवार से मिलवाया है।
वीणा कुमारी की निस्वार्थ सेवा को कई बार सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें राष्ट्रीय महिला सशक्तीकरण पुरस्कार, काका कालेलकर सम्मान-2014 और सुपर अचीवर अवॉर्ड से नवाजा गया है। लेकिन वीणा कहती हैं कि उनके लिए असली पुरस्कार वो मुस्कान है, जो किसी बिछड़ी बेटी के चेहरे पर तब आती है, जब वह वर्षों बाद अपने परिवार से मिलती है।