महिलाओं को पैतृत्क संपत्ति और मैटरनिटी लीव का अधिकार है
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3. मातृत्व लाभ का अधिकार
मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के तहत, कामकाजी महिलाओं को मां बनने की स्थिति में 6 महीने का मातृत्व अवकाश प्राप्त करने का अधिकार है। इस दौरान कंपनी उनके वेतन में कोई कटौती नहीं कर सकती है और उन्हें नौकरी से भी निकाल नहीं सकती है। यह कानून महिलाओं को नौकरी में सुरक्षा और बच्चे की सही देखभाल का अवसर देता है।
4. संपत्ति का अधिकार
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अनुसार, पिता की संपत्ति या पुश्तैनी संपत्ति पर बेटे या बेटी दोनों का समान अधिकार है। शादी के बाद भी महिला अपने माता-पिता की संपत्ति पर दावा कर सकती है।
5. यौन शोषण से सुरक्षा का अधिकार
कामकाजी महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के लिए अधिनियम के तहत अधिकार दिया गया है। हर कंपनी और संगठन में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का होना अनिवार्य है, जहां महिलाएं शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
इसके अलावा यौन उत्पीड़न की शिकार महिला को अपनी पहचान गोपनीय रखने का भी अधिकार है। केवल जिला मजिस्ट्रेट या महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में पीड़ित महिला अपना बयान दर्ज करा सकती है।