Women's Day 2025: पिछले 25 सालों में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। हालांकि उनकी भागीदारी अभी भी पुरुषों की तुलना में कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में इंजीनियरिंग रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत थी। 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में इंजीनियरिंग कॉलेजों में लगभग 30-35% छात्राएं नामांकित हुई। पहले महिलाओं की संख्या इंजीनियरिंग में बहुत कम थी, लेकिन आज देशभर में कई महिला इंजीनियर बन रही हैं।
सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला शकुंतला ए भगत थीं। ए. ललिता भारत की पहली महिला इंजीनियर थीं। शिवानी मीणा सीसीएल की पहली उत्खनन इंजीनियर हैं। इन महिलाओं ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में लड़कियों को प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया।
आइए जानते हैं भारत की पहली महिला इंजीनियर ए. ललिता के बारे में।
कौन थी भारत की पहली महिला इंजीनियर
ए ललिता भारत की पहली महिला इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थीं। उनका पूरा नाम अय्योलासोमायाजुला ललिता था। उनका जन्म 27 अगस्त 1919 को चेन्नई में हुआ था। उनके पिता पप्पू सुब्बा राव पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे। उनके तीनों भाई भी इंजीनियर थे।
ए ललिता ने शादी के बाद की पढ़ाई
15 साल की उम्र में ए ललिता की शादी हो गई। उस समय उन्होंने सिर्फ मैट्रिक पास किया था। शादी के बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया। हालांकि पति की मौत से ललिता के जीवन में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अपनी नन्हीं बच्ची को लिए ए ललिता ससुराल से वापस मायके आ गईं जहां उन्होंने अपनी और अपनी बच्ची की जिंदगी संवारने के लिए दोबारा शिक्षा हासिल की।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री की हासिल
परिवार की मदद से उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और 1943 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। ए ललिता न केवल भारत की पहली महिला इंजीनियर बनीं, बल्कि महिलाओं के लिए इंजीनियरिंग क्षेत्र के दरवाजे खोलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने सीमेंस इंडिया और सीईआईएल जैसी कंपनियों में काम किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई। वे 1964 में इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स (IEEE) की सदस्य बनने वाली पहली भारतीय महिला भी थीं।
कई जगहों पर किया काम
कई जगहों पर काम करने के साथ ए ललिता भारत के सबसे बड़े भाखड़ा नांगल बांध के लिए जनरेटर प्रोजेक्ट का हिस्सा बनीं। यह उनके सबसे प्रसिद्ध कामों में से एक है। 1964 में पहले इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आफ वुमन इंजीनियर एंड साइंटिस्ट कार्यक्रम के आयोजन में उन्हें आमंत्रित किया गया। 1979 में 60 साल की उम्र में ए ललिता का निधन हो गया।