अपनी राजनीति से देश को प्रभावित करके ये साबित किया कि महिलाएं नेतृत्व के उच्च पदों पर पहुंचने और समाज में बदलाव लाने में सक्षम हैं। आइए जानते हैं उन पांच महिला नेताओं के बारे में जिन्होंने आजादी के बाद भारतीय राजनीति में विशेष योगदान दिया।
भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी
भारतीय राजनीति में महिलाओं का जिक्र हो तो सबसे पहले इंदिरा गांधी का नाम लिया जाना चाहिए। वह भारत की पहली और अब तक की सबसे प्रभावशाली महिला प्रधानमंत्री थीं। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बांग्लादेश के गठन में इंदिरा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इंदिरा गांधी ने 1975 में आपातकाल लागू किया, जिसे भारतीय राजनीति का एक बड़ा घटनाक्रम माना जाता है।
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भारत की पहली महिला राज्यपाल सरोजिनी नायडू
सरोजिनी नायडू की स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी रही। वहीं आजादी के बाद संविधान निर्माण के दौरान महिला अधिकारों की पैरोकार रहीं। वह कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष बनीं । साथ ही उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनने के साथ ही वह भारत की पहली महिला राज्यपाल बन गईं। सरोजिनी नायडू भारत कोकिला के नाम से प्रसिद्ध हैं। अपनी कविताओं और भाषणों ने समाज को जागरूक किया।
भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर
राजकुमारी अमृत कौर देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री थीं। भारत की आजादी के बाद जब पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार बनी तो 20 मंत्रियों की कैबिनेट में जगह पाने वाली वह पहली महिला थीं। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भी हिस्सा लिया था। इस दौरान महात्मा गांधी के सचिव के रूप में भी कार्य किया। दुनिया की प्रतिष्ठित पत्रिका टाइम ने उन्हें साल 1947 की
वुमन ऑफ द ईयर भी चुना था। देश में एम्स बनाने का श्रेय भी राजकुमारी अमृत कौर को ही दिया जाता है।
पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी
देश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी थीं। सुचेता कृपलानी प्रसिद्ध गांधीवादी नेता आचार्य कृपलानी की पत्नी थीं। उन्होंने साल 1963 से 1967 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री का पदभार संभाला। देश की आजादी में भी उनका अहम योगदान रहा। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सुचेता कृपलानी अंग्रेजों के शासनकाल में कई बार जेल भी गई थीं।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज
सुषमा स्वराज भारत की पहली पूर्णकालिक महिला विदेश मंत्री थीं। वह एक ऐसी मंत्री थीं जो ट्विटर (X) के माध्यम से आम जनता की समस्याएं सुनती थीं। उनके प्रयासों से आम जनता की विदेश मंत्रालय तक सीधी पहुंच बन सकी। सुषमा स्वराज ने आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में संघर्ष किया। वहीं 1977 में हरियाणा की सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बनीं।