महिलाओं को अपनी सुरक्षा से लेकर समानता से जुड़े कुछ कानूनी अधिकारों के बारे में जरूर जानना चाहिए। जो सरकार उन्हें प्रदान करती है। वैसे तो महिलाएं समाज में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती हैं। लेकिन फिर भी उन्हें घरेलू हिंसा से लेकर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि इन बाधाओं को पार करने के लिए कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी ली जाए। जो हर महिला के लिए बहुत जरूरी है।
समान वेतन का अधिकार
समान वेतन का अधिकार हर महिला का हक है। समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार, अगर बात वेतन या मजदूरी की हो तो लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता।
घरेलू हिंसा से सुरक्षा का अधिकार
ये अधिनियम मुख्य रूप से पति, पुरुष लिव इन पार्टनर या रिश्तेदारों द्वारा एक पत्नी, एक महिला लिव इन पार्टनर या फिर घर में रह रही किसी भी महिला जैसे मां या बहन पर की गई घरेलू हिंसा से सुरक्षा करने के लिए बनाया गया है। अगर किसी महिला के साथ घरेलू हिंसा जैसा अपराध हो रहा है तो वो खुद या उसकी ओर से कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है।
मुफ्त कानूनी मदद के लिए अधिकार
दुष्कर्म की शिकार हुई किसी भी महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का पूरा अधिकार है। स्टेशन हाउस ऑफिसर(SHO) के लिए ये जरूरी है कि वो विधिक सेवा प्राधिकरण(Legal Services Authority) को वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचित करे।
संपत्ति पर अधिकार
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नए नियमों के आधार पर पुश्तैनी संपत्ति पर महिला और पुरुष दोनों का बराबर हक है।
काम पर हुए उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार
काम पर हुए यौन उत्पीड़न अधिनियम के अनुसार आपको यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का पूरा अधिकार है।
रात में गिरफ्तार न होने का अधिकार
एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही ये संभव है।