राजस्थान में डायन प्रथा के नाम पर महिला से बर्बरता
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हमें ये समझना चाहिए कि यदि कोई बीमार है या जीवन में परेशानी है तो उसका इलाज डॉक्टर या वैद्य के पास मिलेगा। कई बार हम डॉक्टर से इलाज कराते-कराते उस स्थिति में इलाज को छोड़ देते हैं, जब बीमारी ठीक होने वाली होती है। फिर जादू टोटका करने वालों के फेर में आ जाते हैं और दो-चार लोगों को राहत मिलती है तो वो इनका मुफ्त में प्रचार करने लग जाते हैं। ऐसे फर्जी लोग केवल अपने ठिकाने बनाकर नहीं बैठे हैं, बल्कि बाकायदा खुले मंच सजाकर भी बीमारियां ठीक करने का स्वांग रचते हैं। ऐसे सैकड़ों वीडियो सोशल मीडिया पर देखे जा सकते हैं।
डायन प्रथा को लेकर कोई केंद्रीय कानून तो नहीं है, लेकिन राज्यों में अपने-अपने यहां कानून बना रखे हैं। राजस्थान डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2015 और राजस्थान डायन प्रताड़ना निवारण नियम 2016 के तहत किसी महिला को डायन घोषित कर बदनाम या प्रताड़ित कर नुकसान पहुंचाने पर अपराधी को 1 से 5 साल तक कठोर कारावास या 50,000 रुपए का जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र, जादू-टोटका कर किसी व्यक्ति को नुकसान या चोट पहुंचाता है तो उसे 1 से 3 साल तक का कारावास या 10,000 रुपए का जुर्माना अथवा दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
वैसे तो शासन-प्रशासन डायन प्रथा को लेकर समय-समय पर जन-जागरूकता के कार्यक्रम चलता है, लेकिन सोशल मीडिया पर खुलेआम फर्जी दावे कर रहे तत्वों पर लगाम नहीं लगाई जा सकी है। सरकारी बसों में ऐसे स्टिकर लगे मिल जाते हैं, जो वशीकरण, बीमारियों का शर्तिया इलाज आदि का दावा करते हैं, जबकि उनके पास कोई भी मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं होती। कुछ लोग बाकायदा बड़े आयोजन का स्टेज सजाकर बीमारियों को ठीक करने का ड्रामा करते हैं। ऐसे तत्वों पर सरकार को सख्ती से रोक लगानी चाहिए और केंद्रीय स्तर पर एक सख्त कानून बनना चाहिए।
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