भारतीय मूल की महिला पत्रकार मेघा राजगोपालन को पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। दुनियाभर में पत्रकारिता जगत का सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता है। मेघा राजगोपालन ने दुनिया के सामने चीन के झूठ की पोल खोल कर दी। मेघा ने अपनी रिपोर्ट्स में चीन के डिटेंशन कैंपों में लोगों को दी जा रही यातना की सच्चाई को उजागर किया। उन्होंने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर बताया कि चीन ने कैसे लाखों की संख्या में उइगुर मुसलमानों को कैद करके रखा हुआ है।
मेघा राजगोपालन लंदन में रहती है, इससे पहले वो चीन, थाईलैंड और अफगानिस्तान जैसे 23 से अधिक देशों में पत्रकार के रूप में रिपोर्टिंग कर चुकी है। वर्तमान में बजफीड में वो एक टेक रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हैं। वह पहले एक राजनीतिक संवाददाता के रूप में रॉयटर्स से जुड़ी थीं।
पुलित्जर ने उन्हें “चीन में उइगुर मुसलमानों के लिए एक नजरबंदी शिविर खोजने और जाने वाली पहली पत्रकार” के रूप में मान्यता दी, जिसके लिए उन्हें 2018 में मानवाधिकार प्रेस पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने फेसबुक और श्रीलंका में हिंसा के बीच संबंधों को उजागर करने के लिए 2019 में मिरर अवार्ड भी जीता था।
अपनी जीत पर मेघा ने कहा, “मैं अपनी रिपोर्टिंग टीम की आभारी हूं। जब मैंने पहली बार अपने एडिटर्स को प्रस्ताव दिया कि हम एक आर्किटेक्ट और एक प्रोग्रामर के साथ चीन के बारे में एक जांच पर काम करते हैं, तो मैंने सोचा कि वे मुझे कहेंगे कि मैं पागल हूं लेकिन इसके बजाय उन्होंने इसके लिए जाने के लिए कहा।”