बिलकिस बानो (फाइल फोटो)
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इसी मामले में जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे एक दोषी ने समय से पहले रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 15 अगस्त के दिन इन 11 दोषियों को रिहा कर दिया गया। इन 11 दोषियों में गोविंद नाई, राधेश्याम शाह, विपिन चंद्र जोशी, जसवंत नाई, केशरभाई वोहानिया, शैलेश भट्ट, प्रदीप मोढ़डिया, राजूभाई सोनी, मितेश भट्ट, बाकाभाई वोहानिया और रमेश चांदना शामिल हैं। उनकी रिहाई के बाद से मामला चर्चा में है और एक बार फिर बिलकिस बानो का नाम सुर्खियों में आ गया है।
क्यों दोबारा सुर्खियों में हैं बिलकिस बानो?
बिलकिस बानो के दोषियों में से एक ने अपनी 14 साल की सजा पूरी करने के बाद सर्वाच्च न्यायालय में समयपूर्व रिहाई के लिए दरवाजा खटखटाया। अदालत ने गुजरात सरकार से दोषी की सजा पर फैसला लेने को कहा। सरकार ने एक समिति का गठन करते हुए सभी दोषियों की समय से पहले रिहाई का आदेश जारी कर दिया। सोशल मीडिया पर रिहाई के बाद दोषियों का सम्मान और स्वागत करते फोटो वायरल हो रही हैं।
सरकार के फैसले के बाद बिलकिस बानो ने भावुक होते हुए कहा, ''जब मैंने सुना कि मेरे परिवार और मेरा जीवन तबाह करने वाले और मेरी तीन साल की बेटी को मुझसे छीनने वाले 11 अपराधी मुक्त हो गए हैं तो मैं पूरी तरह से नि:शब्द हो गई। मैं बस इतना ही कह सकती हूं कि किसी भी महिला के लिए न्याय इस तरह कैसे खत्म हो सकता है?''
बाद में अपराधियों की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही दोषियों को भी पक्ष बनाने का निर्देश दिया है।
उम्रकैद पर क्या कहता है कानून
कानून के अंतर्गत किसी दोषी को उम्रकैद की सजा होने पर उसे कम से कम 14 साल की सजा जेल में काटनी होती है, जिसके बाद दोषी माफी की गुहार लगा सकता है। दोषी के व्यवहार और अपराध की प्रकृति की समीक्षा के आधार पर सरकार फैसला लेती है कि दोषी को रिहा करना है या सजा जारी रखनी है। हालांकि 14 साल का प्रावधान हल्के अपराध के दोषियों पर ही लागू होता है। संगीन मामलों में दोषी को आजीवन कारावास का दंड पूरा करना होता है।