UNICEF India: यूनिसेफ बच्चों के समग्र विकास के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था है। यूनिसेफ भारत में भी कार्य कर रहा है। भारत के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और शिशु जन्म दर को लेकर यूनिसेफ लगातार प्रयासरत है। भारत में मृत शिशु जन्म दर के कई मामले सामने आ चुके हैं। मृत शिशु जन्म का अर्थ है, गर्भ में ही शिशु की मृत्यु हो जाना। ये ऐसे बच्चे हैं तो गर्भावस्था के पहले 28 सप्ताह तक जीवित रहे हों। यूनिसेफ भारत में मृत शिशु जन्म दर कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। गर्भवती के बेहतर स्वास्थ्य और मृत शिशु जन्म दर में सुधार लाने के लिए यूनिसेफ और भारतीय संस्थाएं मिलकर कार्य कर रही हैं। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए कई महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचकर लोगों को जागरूक रही हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री और अस्पतालों में कार्यरत नर्स व मिडवाइफ महिलाओं को प्रसव से पहले और उसके दौरान होने वाली गंभीर परिस्थितियों से बचाने व गुणवत्तापूर्ण देखभाल की कोशिश में रहती हैं। आइए जानते हैं मृत शिशु जन्म को कम करने के लिए कार्यरत महिलाओं के बारे में।
डाॅ. यास्मीन अली हक की सलाह
डाॅ. यास्मीन अली हक यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि रही हैं। उन्होंने भारत में मृत शिशु जन्म को कम करने के लिए कार्य किया। इस दिशा में पिछले कुछ वर्षों में काफी प्रगति हुई है। देश में मृत शिशु जन्म को रोकने के लिए उच्च स्तर की राजनीतिक प्रतिबद्धता और निवेश किया जा रहा है। डाॅ. यास्मीन अली हक ने सलाह दी कि मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल तंत्र के माध्यम से बड़ी संख्या में मृत शिशु जन्म रोके जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना हमारी संयुक्त जिम्मेदारी है कि प्रत्येक महिला गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ व्यवहार और प्रथाओं के बारे में जागरूक हो और उन्हें अपनाए। महिलाओं को प्रसव से पहले और उसके दौरान कुशल और गुणवत्तापूर्ण देखभाल समय पर प्राप्त होनी जरूरी है।
आरती सेनापति के प्रयास
आरती सेनापति एक सहायक नर्स एवं मिडवाइफ(एएनएम) हैं। आरती ने ग्रामीण ओडिशा में पिछले 32 वर्षों में कई महिलाओं को सुरक्षित गर्भधारण करने में मदद की है। अपने करियर के तीन दशकों में आरती ने मृत शिशु जन्म की संख्या में कमी की दिशा में प्रगति देखी है। एक एएनएम और एक माँ के रूप में, आरती मृत शिशु को जन्म देने वाली महिलाओं की गहरी पीड़ा को समझती हैं। आरती सेनापति ने उन महिलाओं को देखा, जो प्याज, मिर्च के साथ केवल थोड़ा सा चावल खाकर जीवनयापन करती हैं। यही महिलाएं गर्भावस्था के उन्नत चरण के दौरान भी कठिन श्रम करती हैं।उनका कहना है कि जल्दी विवाह और बार-बार गर्भधारण से भी मृत शिशु जन्म का खतरा बढ़ जाता है।
भारत में मृत्यु शिशु जन्म दर
स्वास्थ्य सुविधाओं और सामुदायिक स्तर पर मातृ व नवजात सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए यूनिसेफ, सरकार और नागरिक समाज संगठनों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है। धरातल स्थल पर कार्य कर रहीं आरती सेनापति और डॉ. यास्मीन अली हक जैसी इन महिलाओं के प्रयासों के कारण अधिक महिलाएं इस बात से अवगत हैं कि उन्हें अपनी गर्भावस्था के दौरान स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पास जाना है। आयरन फोलिक एसिड की खुराक लेने और अनिवार्य टीकाकरण के बारे में जानकारी रखने लगीं हैं।