इतना ही नहीं टीचर सरासू सबसे पहले स्कूल भी पहुंच जाती हैं। कई बार तो वह स्कूल की छुट्टी होने के बाद सबसे आखिर में घर के लिए रवाना होती हैं। उनके छुट्टी न लेने, समय पर स्कूल पहुंचने से बच्चों पर भी असर पड़ा है। कई बच्चे टीचर सरासू को देखकर उनसे इतने प्रभावित हुए कि वह खुद भी बेमतलब की छुट्टियां लेने से बचते हैं। टीचर सरासू की क्लास में बच्चों की हमेशा फुल अटेंडेंस रहती है।
मिल चुके कई पुरस्कार
सरकारी स्कूलों और वहां के टीचरों की छवि सुधारने के इस प्रयास को लेकर टीचर एस सरासू को कई संस्थाओं ने सम्मानित भी किया। उन्हें अब तक लगभग 50 पुरस्कार भी मिल चुके हैं। वहीं तमिलनाडु सरकार ने एस सरासू को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का भी अवार्ड दिया है।