इंफोसिस संस्था केवल रकम को दान ही नहीं कर रही है बल्कि वो इस बात का ध्यान भी रख रही है कि इसे कहां खर्च किया जा रहा है। जैसे फाउंडेशन की ओर से वेंटिलेटर, टेस्टिंग किट्स, फेसमास्क, प्रोटेक्टिव मास्क दिए जा रहे हैं। सुधा मूर्ति जो इस वेलफेयर संस्था की फाउंडेशन हैं इस बात का पूरा ध्यान रखती हैं कि इस महामारी से लड़ने में पूरी मदद की जा सके।
सुधा मूर्ति देश की उन महिलाओं में शुमार हैं जो परफेक्ट मां से लेकर बिजनेस पार्टनर तक का हर दायित्व बखूबी निभा रही हैं।
साधारण सी दिखने वाली सुधा मूर्ति असाधारण प्रतिभा और व्यक्तित्व की धनी हैं। वो अपना जीवन इतना साधारण तरीके से जीती हैं कि उन्हें देखकर कोई नहीं कह सकता कि वो इतने बड़े व्यवसायिक घराने की मालकिन हैं। सुधा जी ने अपने पति और बच्चों की खातिर अपना करियर भी छोड़ दिया था। उन्होने ये सब केवल अपने पति के बिजनेस में सहयोग देने के लिए ही किया था। बिजनेस के शुरूआती दौर में उन्होने नारायण कृष्णमूर्ति का साथ देने के लिए अच्छे खासे करियर की तिलांजलि दे दी।
सुधा मूर्ति प्रतिभा की धनी थीं। वो टाटा इंजीनियरिंग लोकोमोटिव कंपनी की पहली महिला इंजीनियर थीं। उन्होंने डेवलपमेंट इंजीनियर के पद पर पुणे में काम करना शुरू किया था। सुधा जी ने 1996 में इंफोसिस फाउंडेशन की शुरूआत की थी। तब से वो इस संस्था के साथ ही बिल गेट्स फाउंडेशन से भी जुड़ी हुईं हैं और हेल्थ केयर के क्षेत्र में समाज सेवा कर रही हैं।