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स्टार्टअप के जरिए बुनकरों को दे रहीं रोजगार, हैंडमेड कपड़ों को मिल रहा बढावा

Thu, 01 Oct 2020 10:16 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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हमारे देश में ज्यादातर कपड़े अब मशीनों से बनकर तैयार हो रहे हैं। जबकि खादी और सूती कपड़े को हाथ से बनाने का हुनर हमारे देश के कारीगरों में पहले से था। लेकिन अब डिजाइनर कपड़ों को भी हाथ से बनाने का काम हो रहा है। इस काम को करने की शुरूआत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी हैदराबाद के स्नातक की छात्रा एकता जायसवाल ने की है। हैंड एंब्रायडरी और हाथों की कारीगरी के जरिए नए ब्रांड हस्तकथा के लिए ड्रेस डिजाइन करती हैं।

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एकता बताती हैं कि वो अपनी ब्रांड को बढावा देने के लिए ड्राइंग, एंब्रायडरी के साथ ही प्रिंटिंग का काम भी हाथ से करती हैं। बड़े डिजाइनर अपने प्रोडक्शन को बढाने के लिए ज्यादातर मशीन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन वो अपने ब्रांड की ड्रेस को बनाने के लिए भारतीय कारीगरों का सहारा लेती हैं। जिससे कि हाथों से बने कपड़ों को बढावा मिले। साथ ही बुनकरों और कारीगरों को रोजगार भी मिले।
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एकता ने अपने इस बिजनेस की शुरूआत सहेली दिव्या के साथ मिलकर साल 2016 में की थी। अमेरिकन ई-कॉमर्स वेबसाइट 'इट्सी' पर हस्तकथा को शुरू किया। हस्तकथा के जरिए एकता लोककला और पारंपरिक कपड़ों के इस्तेमाल से लिनेन और कॉटन के गारमेंट्स बनाती हैं। इसमें लड़कियों के लिए मैक्सी ड्रेस, जंप सूट्स, स्कार्फ आदि डिजाइन किए जाते हैं।

एकता को फैशन इंडस्ट्री में काम करते हुए चार साल हो गए हैं। इन सालों में एकता ने ई कॉमर्स कंपनी, हैंडलूम रिटेल ब्रांड और इंटरनेशनल फैशन एक्सपोर्ट हाउस के जरिये नाम कमाया है। इस दौरान एकता ने भारत के अलग-अलग राज्यों का दौरा कर वहां के हैंडमेड टेक्सटाइल को समझा और उसका उपयोग अपने कलेक्शन में भी किया। उसके बाद एकता ने ईको फ्रेंडली फैब्रिक पर काम कर कॉटन के कपड़ों डिजाइन करती हैं।

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