कौन हैं हलीमा याकूब
हलीमा याकूब सिंगापुर की आठवीं और देश की पहली महिला राष्ट्रपति हैं। वर्ष 2017 में हलीमा का निर्विरोध राष्ट्रपति पद पर चुनाव हुआ था।
हलीमा याकूब का जीवन परिचय
हलीमा याकूब का ताल्लुक भी भारत से है। हलीमा के पिता भारतीय थे, जो सिंगापुर में बस गए थे। वह एक चौकीदार थे और सरकारी क्वार्टर में रहते थे। हालांकि जब हलीमा 8 वर्ष की हुईं तो उनके पिता का इंतकाल हो गया और परिवार की जिम्मेदारी हलीमा की मां पर आ गई।
हलीमा का संघर्षपूर्ण जीवन
पिता के निधन के बाद हलीमा के परिवार को सरकारी क्वार्टर से निकाल दिया गया। उनकी मां मलय समुदाय की थीं, वह हलीमा समेत अपने चार बच्चों को पालने के लिए ठेला लगाया करती थीं। हलीमा अपनी मां की मदद के लिए सुबह पांच बजे उठकर बाजार से सामान खरीदने जातीं। फिर स्कूल जाती और क्लास की पिछली बेंच पर बैठा करती थीं।
शिक्षा और करियर
उन्होंने सिंगापुर चीनी गर्ल्स स्कूल और तंजोंग कटोंग गर्ल्स स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और सिंगापुर विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। बाद में उनकी शादी मोहम्मद अब्दुल्ला अल हब्शी से हो गई। राजनीति में आने से पहले हलीमा नेशनल ट्रेड्स यूनियन कांग्रेस में एक कानूनी अधिकारी के रूप में कार्य करती थीं। उन्होंने सिंगापुर इंस्टीट्यूट आफ लेबर स्टडीज के निदेशक पद पर भी सेवा दी।
राजनीतिक करियर
2011 में हलीमा राजनीति में आईं, जब उन्हें संसद सदस्य के रूप में चुना गया। उन्हें कई मंत्रालय का पदभार भी मिलता रहा। पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था पीएपी की केंद्रीय कार्यकारी समिति में भी हलीमा का शामिल किया गया। साल 2015 में नवगठित मार्सिलिंग-यू टी जीआरसी में उनका चुनाव हुआ। 2017 में पात्रता प्रमाणपत्र जारी करने वाली एकमात्र उम्मीदवार होने के नाते, हलीमा सिंगापुर की आठवीं राष्ट्रपति नियुक्त किया गया।
हलीमा का भारत कनेक्शन
हलीमा के पिता भारतीय मुसलमान थे और मां मलय समुदाय की हैं। सिंगापुर में उन्हें अल्पसंख्यक नस्ल का माना जाता है। इस कारण वह राष्ट्रपति पद के लिए खड़ी नहीं हो सकती थीं, इसलिए हलीमा ने अपनी मां की पहचान को अपनाया।