कौन हैं संगीता पांडेय
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में रहने वाली संगीता पांडे ढाई करोड़ की कंपनी की मालकिन हैं। वह अपने व्यापार से लाखों की कमाई कर रही हैं। उनकी इस सफलता और जज्बे के लिए सरकार ने उन्हें गोरखपुर रत्न से सम्मानित किया है।
संगीता पांडेय का जीवन परिचय
कम संसाधनों में छोटे व्यापार को शुरू कर उसे बुलंदियों तक पहुंचाने का जज्बा रखने वाली संगीता सिंह आज महिलाओं ही नहीं बल्कि व्यापार करने वाले पुरुषों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। संगीता पांडेय गोरखपुर के झरणाटोला की रहने वाली हैं। संगीता सैनिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता और भाई सेना में हैं।
संगीता पांडे की शिक्षा
संगीता ने शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से की और बाद में गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक किया। पढ़ाई के बाद उनकी शादी हो गई लेकिन उनकी महत्वाकांक्षा कभी कम न हो सकीं।
फैंसी पैकिंग के डिब्बों का कारखाना
साधारण घरेलू महिलाओं की तरह जीवन जी रही संगीता ने कुछ करने की ठानी और मिठाई की पैकेजिंग के लिए फैंसी डिब्बे तैयार करने की योजना बनाई। जिले के पादरी बाजार में स्थित शिवपुर सहबाजगंज में मिठाई की दुकानों के लिए फैंसी पैकिंग डिब्बे बनाने वाले एक कारखाने की शुरुआत की।
व्यापार की शुरुआत महज 1500 रुपये में की। संगीता गोलघर की एक प्रतिष्ठित दुकान में ऑर्डर के लिए पहुंचीं। उनके पास एक साइकिल थी, जिससे वह ऑर्डर के तलाश में जाती थीं। दुकान से पहला ऑर्डर मिला तो संगीता ने 20 डिब्बे तैयार किए। दुकानदार को ये डिब्बे पसंद आए, उसके बाद उन्हें और अधिक ऑर्डर मिलने लगे।
आज संगीता लगभग डेढ़ सौ महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। उनकी कंपनी करोड़ों कमाती है। जो लोग उनके काम पर ताने मारते थे और सपोर्ट नहीं देते थे, उन सब को संगीता ने अपने बुलंद हौसलों से झुका दिया।