8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस होता है। दुनिया भर की महिलाओं को प्रोत्साहित करने, उनके मनोबल को बढ़ाने और समाज में उनकी स्थिति को मजबूत करने के लिए विश्व के लगभग सभी देश महिला दिवस मनाते हैं। जहां महिलाओं के कार्यों, उनके कर्तव्यों, समाज में उनकी सशक्त भूमिका को लेकर सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाता है। भारत में भी महिला दिवस को अब बड़े स्तर पर जगह जगह मनाया जाता है। कार्यालयों से लेकर सामाजिक कार्यक्रमों में महिला दिवस को एक उत्सव के तौर पर मनाते हैं लेकिन भारत के लिए असली महिला दिवस मार्च में नहीं बल्कि नवंबर में होना चाहिए। नवंबर का महीना भारतीय महिलाओं के लिए बेहद अहम है। अगर भारत के इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो इस महीने में देश की महिलाओं ने जो किया वह महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण और आज की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन जाएगी। चलिए जानते हैं आखिर नवंबर में क्यों मनाया जाना चाहिए भारतीय महिला दिवस।
इन महिलाओं का नवंबर में हुआ जन्म
रानी लक्ष्मीबाई का नाता
भारत के इतिहास को जानने वाले अगर भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों को जानते हैं तो झांसी की रानी लक्ष्मी बाई का नाम भी उन्हें जरूर याद होगा। देश की पहली महिला क्रांतिकारी रानी लक्ष्मी बाई का जन्म इसी महीने में हुआ था। 19 नवंबर को बनारस के मणिकर्णिका में जन्मी मनु मराठा राज्य की रानी बनी। पर केवल एक रानी नहीं, उनका नाम एक क्रांतिकारी, वीरांगना के तौर पर इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो गया। ब्रिटिश राज और अंग्रेजों से लोहा लेने वाली झांसी की रानी नारी शक्ति की मिसाल बन गईं।
इंदिरा गांधी का जन्मदिन नवंबर में
वहीं देश की पहली और इकलौती महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जन्म भी इसी महीने में हुआ था। इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर को प्रयागराज में हुआ था। उन्हें लौह महिला के नाम से भी जाना जाता है। आजाद भारत की सबसे सशक्त महिलाओं में इंदिरा गांधी का नाम सबसे पहले आता है। दूसरी सबसे ज्यादा बार प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड उनके नाम है। बैंकों के राष्ट्रीयकरण से लेकर पाकिस्तान से युद्ध और बांग्लादेश के बनने तक उन्होंने कई बड़े फैसले लिए।
कल्पना चावला के नाम उपलब्धि
देश तकनीकी की दिशा में जितना आगे बढ़ रहा है, देश की महिलाओं की भागीदारी भी उतनी ही बढ़ रही है। कल्पना चावला का नाम तो सुना ही होगा। अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला कल्पना चावला के नाम इसी महीने में ये उपलब्धि दर्ज हुई, जो केवल एक महिला के नहीं बल्कि देश के लिए भी सम्मान की बात बन गई।