असहजता महसूस होना, अचानक कमर या पेट दर्द होना और पेट को छूने पर दर्द होना एवं शिशु की हार्ट रेट में दिक्कत आना शामिल है। जरूरी है गर्भावस्था में खूब सारा पानी पिया जाए। वहीं खानपान का ध्यान रखना भी जरूरी है।
अक्सर प्लेसेंटा एब्रप्शन के कारण का पता नहीं चल पाता है। किसी दुर्घटना या पेट पर चोट लगने के कारण ऐसा हो सकता है। जिसकी वजह से गर्भाशय के आसपास शिशु को सुरक्षा देने वाले एम्नियोटिक फ्लूइड नष्ट हो जाता है। पहले गर्भधारण में पेट पर चोट लगने की वजह से प्लेसेंटल एब्रप्शन हुआ हो या फिर लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर हो। प्रेगनेंसी में हाई बीपी (प्रीक्लैंप्सिया या एक्लैंप्सिया), पेट के बल गिरने, धूम्रपान, प्रेगनेंसी में कोकीन लेने, झिल्लियों के समय से पहले फटने (इससे डिलीवरी से पहले ही एम्नियोटिक फलूइड फट जाता है), प्रेगनेंट महिला के गर्भाशय के अंदर संक्रमण होना और 40 से अधिक उम्र की गर्भवती महिलाओं में भी प्लेसेंटल एब्रप्शन का जोखिम रहता है। इस तरह के खतरे से दूर रहने के लिए जरूरी है कि गर्भावस्था में मांए खुद की देखभाल करें। साथ ही सही खानपान हरी पत्तेदार सब्जियां, फल वगैरह का सेवन जरूर करें। ऐसी अवस्था में प्राकृतिक रूप से होने वाली एब्रप्शन की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।