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Paris Paralympic 2024: पैरा ओलंपिक में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला अवनी लेखरा के संघर्ष की कहानी

Wed, 28 Aug 2024 04:40 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पैरा शूटर अवनि लेखरा, एक ही पैरा ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं। अवनी SH1 कैटेगरी से 10 मीटर एयर राइफल शूटर हैं। टोक्यो पैरा ओलंपिक में उन्होंने इसी श्रेणी से स्वर्ण पदक जीता था। व
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अवनी लेखरा - फोटो : Instagram/avani.lekhara
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विस्तार
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Paris Peralympics 2024: ओलंपिक 2024 की मेजबानी के बाद पेरिस पैरालंपिक का आगाज हो गया है। पेरिस पैरालंपिक के उद्घाटन समारोह में भारतीय दल के 100 से अधिक सदस्यों ने भाग लिया। भारत की ओर से इस बार 84 पैरा एथलीट्स  पेरिस पैरालंपिक 2024 में शामिल हुए हैं। पिछली बार भारतीय पैरा खिलाड़ी 19 पदक जीत कर देशों की अंक तालिका में 24वें स्थान पर रहें। इस बार भी भारतीय पैरा एथलीट्स से काफी उम्मीदें हैं।

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पैरा ओलंपिक 2024 में अवनी लेखरा भी प्रतिभाग ले रही हैं। अवनी लेखरा भारत के खेल जगत में चमकता हुआ सितारा हैं, जिनकी मेहनत, साहस और समर्पण ने न केवल जीवन की दिशा बदली, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गईं। आइए जानते हैं, उनके जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक कहानी, जो हमें सिखाती है कि किसी भी परिस्थिति में हार नहीं माननी चाहिए।

कौन हैं अवनी लेखरा

पैरा शूटर अवनि लेखरा, एक ही पैरा ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं। अवनी SH1 कैटेगरी से 10 मीटर एयर राइफल शूटर हैं। टोक्यो पैरा ओलंपिक में उन्होंने इसी श्रेणी से स्वर्ण पदक जीता था।
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SH1 श्रेणी उन राइफल शूटरों के लिए है जिनके निचले अंगों में अंग-भंग या पैराप्लेजिया जैसी कमज़ोरी है और जो बिना किसी कठिनाई के अपनी बंदूक पकड़ सकते हैं और खड़े या बैठे हुए शूटिंग कर सकते हैं।

12 साल की उम्र में हुई दुर्घटना

अवनी लेखरा का जन्म 8 नवंबर 2001 को जयपुर, राजस्थान में हुआ था। वे एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं, जहां शिक्षा और खेल दोनों को समान महत्व दिया जाता था। लेकिन उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ 2012 में आया, जब एक कार दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी, जिससे उन्हें पैरालिसिस हो गया। महज 12 साल की उम्र में उनके साथ हुए इस हादसे ने अवनी का जीवन पूरी तरह से बदल दिया, लेकिन अवनी ने इस कठिन परिस्थिति को चुनौती के रूप में लिया।

खेल से मिली नई राह

दुर्घटना के बाद अवनी ने अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए खेल को चुना। उनकी प्रेरणा का स्रोत था मशहूर खिलाड़ी अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा। उन्होंने निशानेबाजी (शूटिंग) में रुचि दिखाई और अपनी मां और कोच की सहायता से इस खेल में कदम रखा। जल्द ही उन्होंने अपने हुनर को निखारना शुरू किया और 2015 में पहली बार नेशनल चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया।

पैरालम्पिक से सफलता की कहानी

अवनी की मेहनत और दृढ़ संकल्प ने उन्हें 2020 टोक्यो पैरा ओलम्पिक में भाग लेने का मौका दिलाया, जहां उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल SH1 इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वे पैरा ओलम्पिक में गोल्ड जीतने वाली भारत की पहली महिला बनीं। इसके साथ ही उन्होंने 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन SH1 इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता। अवनी की यह उपलब्धि केवल खेल में नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक सीमाओं को भी पार कर गई।

साल 2022 में अवनी ने पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा। बेहतरीन खेल प्रदर्शन के लिए अवनी को खेल रत्न पुरस्कार, यंग इंडियन ऑफ द ईयर, पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

अवनी लेखरा की शिक्षा

जयपुर केंद्रीय विद्यालय से अवनी ने स्कूली शिक्षा पूरी की। उसके बाद राजस्थान से ही कानून की पढ़ाई की। राजस्थान सरकार ने बेहतरीन खेल प्रदर्शन के लिए अवनी लेखरा को सहायक वन संरक्षक के रूप में आउट ऑफ टर्न नियुक्त किया है।

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