फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीरूबाला रभा को मिला पद्मश्री पुरस्कार, 15 सालों से जादू-टोने और डायन प्रथा के खिलाफ चला रहीं मुहिम

Fri, 29 Jan 2021 09:28 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
Padma Shri Award 2021 - फोटो : social media
विज्ञापन

25 जनवरी को देश के हर कोने से उन लोगों को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। जो समाज के लिए किसी ना किसी तरह अपना योगदान दे पूरा जीवन समर्पित कर चुके हैं। इसी में से एक नाम है बीरूबाला रभा का। जो पिछले 15 सालों से महिलाओं के खिलाफ हो रहे जादू-टोने और डायन जैसी प्रथाओं के अत्याचार को रोकने का काम कर रही हैं। वह असम के दूर अंचल गावों में जाकर महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाती हैं। 

विज्ञापन
Trending Videos

पद्मश्री पुरस्कार पाकर बीरूबाला रभा का मनोबल काफी ऊंचा है। वो बेहद उत्साहित हैं और इस पुरस्कार को उन लोगों को समर्पित करती हैं जो इस अभियान में उनका साथ देते हैं। असम की रहने वाली बीरूबाला रभा के पिता की मृत्यु मात्र 6 साल की उम्र में हो गई। जिसके बाद बीरूबाला को पढ़ाई छोड़ मां के साथ खेतों में काम करना पड़ा। 15 साल की उम्र में एक किसान से शादी के बाद वो तीन बच्चों की जिम्मेदारी कपड़ा बुनकर उठाती थीं। 1980 में जब उनके बड़े बेटे को टायफाइड हुआ तो वो इलाज के लिए गांव के नीम-हकीम के पास गईं। जहां पर बताया गया कि उनका बेटा मर जाएगा। लेकिन बच्चे की जान बच गई। तब से बीरूबाला ने नीम हकीम और जादू टोना करने वालों के विरोध में अभियान चलाने की शुरुआत की।
विज्ञापन

बीरूबाला ने जब ये देखा कि गांवों में महिलाओं को डायन बताकर उनकी हत्या कर दी जाती है, तो उन्होंने महिलाओं का एक समूह बनाया और डायन के नाम पर महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद की। वे स्कूलों में जाकर बच्चों को डायन प्रथा और जादू टोने से दूर रहने के प्रति जागरूक करती हैं। बीरूबाला अब तक 42 से अधिक महिलाओं की जान बचा चुकी हैं। उनकी कोशिशों के चलते असम की विधानसभा ने "डायन हत्या निषेध" विधेयक पारित किया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें