स्त्री धन अधिकार
हर महिला को उसकी शादी के वक्त, गोद भराई या किसी रस्म के दौरान मिले सभी तरह के तोहफे, जेवर, कपड़े, पैसे या संपत्ति पर उसी महिला का हक होता है। बिना किसी जोर जबरदस्ती के शादी से पहले और शादी के बाद महिला को मिले सामान को स्त्री धन कहते हैं, जिस पर सिर्फ उसी का अधिकार होता है।
पैतृक संपत्ति अधिकार
विवाहित बेटी का अपने माता पिता की संपत्ति पर हक बनता है। शादी के बाद भी वह माता-पिता की संपत्ति की वारिस बन सकती है। चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित अन्य बच्चों की तरह उसका भी माता पिता की संपत्ति पर समान अधिकार होता है।
दहेज निषेध अधिकार
महिला के पास यह अधिकार है कि वह दहेज मांगे जाने पर केस दर्ज करा सकती है। दहेज लेने वाले और देने वाले दोनों ही अपराधी होते हैं। ऐसे में महिला अपने माता पिता या लड़के के माता पिता पर केस कर सकती है और उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है।
गर्भपात का अधिकार
महिला के पास ये अधिकार होता है कि वह शादी के बाद अगर मां नहीं बनना चाहती तो अपनी मर्जी से गर्भपात करवा सकती है। गर्भपात के लिए महिला को अपने पति या परिवार की रजामंदी की जरूरत नहीं होती।
विवाह का अधिकार
महिला से शादी या कोई संबंध बनाने के लिए उसके माता पिता समेत कोई भी जोर जबरदस्ती नहीं कर सकता है। महिला के पास कानूनी अधिकार होता है कि वह अपनी पसंद के शख्स से शादी कर सकती है।
पति पर अधिकार
विवाहित महिला को कानून ये अधिकार देता है कि अगर उन का पति किसी दूसरी स्त्री से मानसिक और शारीरिक संबंध बनाता है तो वह इसका विरोध कर सकती हैं। विवाहित महिला का पति किसी दूसरी महिला से संबंध नहीं बना सकता है।