फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahadevi Verma: महादेवी वर्मा कैसे बनी हिंदी की मशहूर कवयित्री? जानें उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें

Tue, 10 Sep 2024 04:53 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महादेवी वर्मा के लेखन में भारतीय नारी की पीड़ा, उनकी इच्छाएं और उनके संघर्षों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है। वह मात्र एक कवयित्री ही नहीं, निबंधकार और समाजसेवी के रूप में प्रसिद्ध हुईं।
विज्ञापन
महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Mahadevi Verma Death Anniversary 2024: 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। हिंदी के महत्व को समझाने के लिए एक खास दिन भारत में मनाया जाता है लेकिन हिंदी को समृद्ध बनाने का काम हिंदी रचनाकारों ने किया। इन्हीं रचनाकारों में एक महिला का नाम भी शामिल है, जिनके बारे में स्कूल पाठ्यक्रम में हर छात्र-छात्रा को पढ़ाया जाता है। इनका नाम है महादेवी वर्मा। महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की प्रमुख कवयित्रियों में से एक थीं, जिन्हें छायावादी युग के चार स्तंभों में गिना जाता है। कवयित्री महादेवी वर्मा का साहित्यिक योगदान बहुत महत्वपूर्ण और व्यापक है। इस कारण उन्हें "हिंदी साहित्य की मीरा" भी कहा जाता है।

विज्ञापन


उनके लेखन में भारतीय नारी की पीड़ा, उनकी इच्छाएं और उनके संघर्षों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है। वह मात्र एक कवयित्री ही नहीं, निबंधकार और समाजसेवी के रूप में प्रसिद्ध हुईं। उनका जीवन साहित्य के प्रति समर्पण, समाज सेवा और स्त्री स्वतंत्रता की आवाज के रूप में प्रेरणादायक रहा है। 11 सितंबर को महादेवी वर्मा का निधन हुआ जो एक साहित्यिक हानि थी। उनकी पुण्यतिथि के मौके पर आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें, महादेवी वर्मा की रचनाएं और उनकी उपलब्धियां।

महादेवी वर्मा की जीवनी

महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में एक शिक्षित परिवार में हुआ था। उनके परिवार की भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था थी। ऐसे में महादेवी का झुकाव बचपन से ही साहित्य और कला की ओर रहा। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उज्जैन से हुई और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. किया। वह लंबे समय तक प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्राचार्या रहीं। इस दौरान इलाहाबाद से प्रकाशित "चांद" मासिक पत्रिका की सम्पादिका थीं।
विज्ञापन


महादेवी वर्मा का साहित्यिक जीवन

महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य के छायावादी युग की प्रमुख कवयित्री थीं। उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, विरह, और अध्यात्म की गहरी अनुभूतियों से भरी हुई हैं। उनकी कविताओं में नारी की पीड़ा, उसकी व्यथा और उसकी शक्ति का सूक्ष्म चित्रण है। उनकी प्रसिद्ध काव्य कृतियाँ हैं, "नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा और यामा, जिसे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

महादेवी वर्मा ने केवल कविताएँ ही नहीं लिखीं, बल्कि निबंध, संस्मरण और कहानियां भी लिखीं। उनकी प्रमुख गद्य रचनाओं में "स्मृति की रेखाएँ," "पथ के साथी," और "अतीत के चलचित्र" शामिल हैं।

महादेवी वर्मा की उपलब्धियां

महादेवी वर्मा ने न केवल साहित्यिक क्षेत्र में, बल्कि समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • महादेवी वर्मा को हिंदी साहित्य में उनके  योगदान के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।
  • महादेवी जी को उनके काव्य संग्रह "यामा" के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • फैलो ऑफ द साहित्य अकादमी (1979): महादेवी वर्मा को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए साहित्य अकादमी का प्रतिष्ठित फैलोशिप पुरस्कार भी मिला।


महादेवी वर्मा ने महिलाओं के लिए उठाई आवाज

महादेवी वर्मा ने अपने लेखन के माध्यम से महिलाओं की स्थिति, उनकी स्वतंत्रता और उनके अधिकारों के बारे में आवाज़ उठाई। वे समाज सेवा में भी सक्रिय थीं और उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों के लिए काम किया। उन्होंने "प्रयाग महिला विद्यापीठ" नामक एक विद्यालय की स्थापना की, जिसमें लड़कियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। महादेवी जी का मानना था कि समाज में बदलाव लाने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना बहुत जरूरी है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें