रुपज्योति गोगोई प्लास्टिक को रीयूज करके बैग्स बनाती है। वे काजीरंगा के बोसागांव में रहती हैं। वैसे तो वे हाउसवाइफ हैं लेकिन पर्यावरण के लिए वे बहुत अच्छा काम कर रही हैं। इससे न सिर्फ वे पर्यावरण का संरक्षण कर रही हैं बल्कि अपने गांव की महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं। आइए जानते हैं रुपज्योति गोगोई और उनके काम से जुड़ी महत्पूर्ण जानकारी।
कचरे को करने लगीं इकट्ठा
काजीरंगा को पर्यटन के लिए जाना जाता है लेकिन कई बार पर्यटक यहां घूमने आते थे तो प्लास्टिक बॉटल या कचरा फेंककर चले जाते थे। रुपज्योति ने उस कचरे को इकट्ठा करना शुरु किया और उसका उपयोग करके ही हैंडबैग, टेबल मेट और भी कई सारे सामान बनाने लगीं।
कुछ नया बनाने का फैसला लिया
रुपज्योति जब खुद बाजार से सामान लाती थीं तो उनके पास कई सारे प्लास्टिक के बैग इकट्ठा हो जाते थे, ऐसे में वे हमेशा उन्हें नया रुप देने के बारे में विचार करती रहती थीं। जब काजीरंगा नेशनल पार्क के आसपास भी उन्होंने प्लास्टिक का कचरा देखा तो उन्होंने इससे कुछ नया बनाने और पर्यावरण को बचाने का निर्णय लिया।
तैयार किया सेल्फ हेल्प ग्रुप
रुपज्योति ने 2004 में गांव की महिलाओं के साथ विलेज वेव्स नामक एक सेल्फ हेल्प ग्रुप तैयार किया। इसमें वे महिलाएं जुड़ीं जो कि हैंडलूम का काम करना जानती थीं और फिर वे सब मिलकर प्लास्टिक से कई सारी सजावट की चीजें तैयार करने लगे। उनका मुख्य उद्देश्य व्यवसाय नहीं है बल्कि पर्यावरण संरक्षण है।