मेजर जनरल डॉ. माधुरी कानिटकर
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माधुरी कानिटकर भारतीय सशस्त्रबलों में लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पहुंचने वाली तीसरी महिला और पहली बाल रोग विशेषज्ञ हैं। उनका सफर काफी प्रेरणादायर रहा है। माधुरी का कहना है कि अगर महिलाएं फौज में आएंगी तो परिवार का साथ भी जरूर मिलेगा, क्योंकि फौज में सिर्फ परिवार नहीं होता है, पूरी फौज ही एक परिवार होता है।
माधुरी कहती हैं कि कई बार ऐसा हुआ कि उनके बच्चों की देखभाल उनके सहयोगियों ने की। माधुरी अपने पिता की मृत्यु के समय भी मौजूद नहीं थी। उनके साथी ही उस वक्त उनके पिता के साथ थे। माधुरी का हौसला कई बार कमजोर हुआ लेकिन उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी। माधुरी का कहना है कि जब उनके बच्चे छोटे थे तो उन्हें लगता था कि घर से बाहर न जाऊं। उस समय उनका साथ माता- पिता और पति ने दिया। माधुरी का अपने साथियों का भी पूरा साथ मिला।
माधुरी का मानना है कि सीनियर्स की डांट और उनसे सीखना हर जूनियर की प्रोफेशनल जिंदगी में अहम भूमिका निभाता है। माधुरी का कहना है कि सीनियर के हौसले और उनकी डांट ने उन्हें आज यहां तक पहुंचा दिया है।"