Labour Day: आज दुनिया भर में मजदूर दिवस मनाया जा रहा है। मजदूर किसी भी राष्ट्र के निर्माण और विकास में अहम योगदान निभाते हैं। मजदूरों का कोई लिंग या जाति नहीं। वह व्यक्ति जो शारीरिक श्रम करता है, वह मजदूर या श्रमिक कहलाता है।
किसी निर्माण कार्य की नींव रखने से लेकर उसे सुव्यवस्थित तरीके से मजबूत इमारत का रूप देने का काम एक श्रमिक ही करता है।
इस मजदूर दिवस के मौके पर दो महिलाओं का जिक्र किया जाना चाहिए। इन दोनों महिलाओं ने शारीरिक श्रम भले ही कम किया हो लेकिन मजदूरों को रोजगार का बेहतर अवसर जरूर दिया, जो भविष्य में भी कारगर रहेगा। इन दोनों महिलाओं में एक का नाम है मार्गरेट शुत-लिहोतज़्की और दूसरी एलिस ऑस्टिन नाम की महिला हैं। आइये जानते मार्गरेट शुत-लिहोतज़्की और एलिस ऑस्टिन के बारे में, ये दोनों महिलाएं कौन हैं और समाज में इनका क्या योगदान है।
मार्गरेट शुत-लिहोतज़्की
मार्गरेट शुत-लिहोतज़्की पहली ऑस्ट्रियाई महिला आर्किटेक्ट और नाज़ी प्रतिरोध आंदोलन की कार्यकर्ता थीं। 23 जनवरी 1897 को जन्मी मार्गरेट मॉडर्न किचन की डिजाइन के लिए याद की जाती हैं। उन्होंने फ्रैंकफर्ट किचन को डिजाइन करने में अपना योगदान दिया।
1997 में अपना 100वां जन्मदिन मनाते हुए और वास्तुकला का अध्ययन करने के अपने निर्णय को याद करते हुए मार्गरेट ने कहा था, "1916 में किसी ने भी एक महिला को घर बनाने के लिए नियुक्त किए जाने की कल्पना नहीं की होगी, यहां तक कि मैंने भी नहीं।"
उनके शानदार डिजाइन के लिए कई सम्मान मिले। बाद में पति संग वह इस्तांबुल भी गयी, जहाँ अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में उन्हें पढ़ाने के लिए बुलाया गया था।
एलिस ऑस्टिन
मार्गरेट ने पहले आधुनिक किचन की डिज़ाइन बनायी, ताकि औरतों को बेहतर जगह मिले और उन्हें ख़राब हालत में रसोई में ज़्यादा मुश्किल न हो। वहीं ऑस्टिन ने तो कीचन को सामुदायिक स्थान में ही बदलने का डिज़ाइन बना दिया, जहाँ अनेक परिवार साथ खा-पी सकें और समय बीता सकें।
एलिस कॉन्स्टेंस ऑस्टिन एक अमेरिकी वास्तुकार, सिटी प्लानर, कट्टरपंथी नारीवादी, समाजवादी, डिजाइनर और यूटोपिस्ट थीं।