शांति तिग्गा पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी की रहने वाली थीं। जहां पर उनका संबंध एक अनुसूचित जनजाती समुदाय से था। बहुत ही कठिन परिस्थितियों में बचपन गुजारने के बाद उनका विवाह कम उम्र में ही कर दिया गया। लेकिन दो बच्चों के बाद पति के मर जाने पर वो विधवा हो गईं। पति की नौकरी के आधार पर शांति को रेलवे में अनुकंपा के तौर पर पॉइंट्समैन की नौकरी मिल गई। पांच सालों तक नौकरी करने के बाद उनके मन में सेना में भर्ती होने की इच्छा जगी।
परिवार के सदस्यों के रक्षा बलों में होने के कारण उन्हें इस बारे में थोड़ी बहुत जानकारी थी। इसके बाद उनके मजबूत इरादों के आगे कुछ भी टिक नहीं पाया और वो 35 वर्ष की उम्र में और दो बच्चों की मां होने के साथ सेना में भर्ती होने का रिकार्ड बनाईं। जहां पर उनकी भर्ती प्रादेशिक सेना में हुई। शांति ने अपने भर्ती प्रशिक्षण के दौरान पुरुष सहकर्मियों को भी पीछे छोड़ दिया था। 1,5 किमी की दौड़ को पुरुषों के मुकाबले 5 सेकंड पहले ही पूरा किया था। वहीं 50 मीटर की दौड़ को महज 12 सेकंड में पूरा कर लिया था। बंदूक चलाने के कौशल की वजह से वो इंस्ट्रक्टरों को काफी प्रभावित कर चुकी थीं। जिसकी वजह से उन्हें बेस्ट ट्रेनी घोषित किया गया था।