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गाजा की महिलाओं ने बेरोजगारी से निजात पाने का ढूंढा अनोखा तरीका, तुलसी, पुदीना और कैमोमिले से बना रही हैं ब्यूटी प्रोडक्ट्स

Sat, 31 Jul 2021 02:29 PM IST
संकल्प सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गाजा की महिलाओं ने बेरोजगारी से निजात पाने के लिए एक अनोखा तरीका ढूंढा है। वे विभिन्न प्रकार की औषधियों का प्रयोग करके उनका शैंपू, मॉइश्चराइजर बना रही हैं। उनके द्वारा बनाए गए इन ब्यूटी प्रोडक्ट्स की बिक्री 50 स्टोर्स में हो रही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Facebook/Muslim_women's_Council
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विस्तार
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लंबे समय से इस्राइल और फिलिस्तीन के विवाद के चलते गाजा स्ट्रिप को बहुत नुकसान उठाना पड़ा है। हमास और इस्राइली सेना के बीच होते युद्ध में वहां के आम नागरिकों को कई परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस्राइल ने गाजा को कई तरफ से ब्लॉक कर रखा है। इस कारण वहां पर अर्थव्यवस्था से जुड़ी कई गतिविधियां नहीं चल पा रही हैं। गरीबी और बेरोजगारी का साया दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में गाजा की महिलाओं ने बेरोजगारी से निजात पाने के लिए एक अनोखा तरीका ढूंढा है। वे विभिन्न प्रकार की औषधियों का प्रयोग करके उनका शैंपू, मॉइश्चराइजर बना रही हैं। उनके द्वारा बनाए गए इन ब्यूटी प्रोडक्ट्स की बिक्री 50 स्टोर्स में हो रही है। गाजा की एक फैक्ट्री में काम करने वाली ये महिलाएं रोजमेरी, पुदीना, कैमोमिले और तुलसी को प्रयोग में लाकर ब्यूटी प्रोडक्ट्स को तैयार कर रही हैं। ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाने का ये काम गाजा की महिलाओं को खूब पसंद आ रहा है।

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वहां काम करने वाली एक महिला रेफका अल हमाल्वी बताती हैं - "इन प्रोडक्ट्स को बनाते वक्त हमको ऐसा लगता है, जैसी कि हम जमीन से जुड़े हुए हैं। इस काम को करने में किसी भी तरह का एडिटिव्स का प्रयोग नहीं किया जाता है।"

आपको बता दें कि गाजा की ये महिलाएं 17 प्रकार के ब्यूटी प्रोडक्ट्स को बना रही हैं। इसमें ब्रांड सीजी के तहत क्लींजर और बॉडी वॉश भी शामिल है। हमाल्वी कहती हैं - "अक्सर ये सब चीजें यूरोपियन देशों में किया जाता है। इस काम को यहां पर इन महिलाओं द्वारा करना काफी गर्व की बात है।" इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। इसके अलावा उनकी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।
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इस काम को करने के लिए उन्हें ऑस्ट्रेलिया और ग्लोबल चैरिटी ऑक्सफैम का समर्थन भी प्राप्त है। गाजा में काफी बेरोजगारी है। इस कारण इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से पहले वहां कि महिलाएं पुदीना और थाइम की खेती करके उसे स्थानीय बाजारों में बेच देती थी। अब फैक्ट्री के खुल जाने की वजह से वे सुबह 5 बजे पहुंच जाती हैं और दिन में 40 से 50 किलो के ऑर्डर को पूरा करती हैं। 
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