महिलाओं के खिलाफ कुरीतियों का अंत
साल 1926 में मुथुलक्ष्मी का नामांकन महिला भारतीय संघ द्वारा मद्रास विधान परिषद के लिए हुआ। साल 1926 से 30 तक वह परिषद की सदस्य रहीं। मुथुलक्ष्मी ने महिलाओं की उत्थान की दिशा में कार्य करते हुए बाल विवाह रोकथाम कानून, देवदासी प्रथा का अंत, वेश्यालय को बंद कराने और महिलाओं व बच्चों की तस्करी रोकने के लिए कानून बनाने में अहम भूमिका निभाई।
देवदासी प्रथा के खिलाफ कानून
उस दौर में देवदासी प्रथा चलन में थी, जिसमें किशोरियों व महिलाओं को भगवान की शरण में दे दिया जाता था। मुथुलक्ष्मी ने देवदासी प्रथा को खत्म करने के लिए कानून पास कराया। कट्टर समूहों के विरोध के बाद भी मद्रास विधान परिषद ने सर्वसम्मति से इस कानून का समर्थन किया और 1947 में देवदासी प्रथा के खिलाफ प्रेषित विधेयक आखिरकार कानून बन गया।