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भारत की पहली महिला वकील कॉर्नेलिया सोराबजी, जिन्होंने की वकालत

Sat, 28 Nov 2020 09:39 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कार्नेलिया सोराबजी - फोटो : सोशल मीडिया
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भारत की पहली महिला वकील बनने का गौरव कॉर्नेलिया सोराबजी के पास है। जिन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद ऑक्सपोर्ड से वकालत की पढ़ाई की। आजादी के पहले भारत में किसी भी महिला का उच्च शिक्षा में पढ़ना इतना आसान नहीं था। लेकिन कॉर्लेनिया ने वकालत की पढ़ाई कर सारे बंधनों को तोड़ा। परीक्षा में सबसे ज्यादा अंक पाने के बावजूद उन्हें महिला होने के नाते स्कॉलरशिप से दूर रखा गया। ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके लिए ऑक्सफोर्ड जाकर पढ़ना मुश्किलों भरा था। तब कुछ अंग्रेज महिलाओं की मदद से उनके लिए फंड का इंतजाम किया गया और कॉर्नेलिया वकालत की पढाई के ऑक्सफोर्ड पहुंची। 1892 में कॉर्नेलिया ने बैचलर ऑफ सिविल लॉ की परीक्षा पास करने वाली पहली महिला बनीं। लेकिन कॉलेज ने उन्हें डिग्री देने से मना कर दिया। क्योंकि उस काल में महिलाओं को वकालत के लिए रजिस्टर करने और प्रेक्टिस की इजाजत नहीं थी। 

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लेकिन कॉर्नेलिया ने हार नही मानी। भारत लौटकर वापस आने के बाद वो महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए मदद करने लगीं। काफी अथक परिश्रम के बाद कार्नेलिया को सफलता हाथ लगीं। वकालत के दौरान कार्नेलिया ने 600 से ज्यादा महिलाओं को कानूनी सलाह दी। 1922 में लंदन बार ने महिलाओं को कानून की प्रैक्टिस करने की आज्ञा दी। तब कार्नेलिया को कानून की डिग्री हासिल हुई। कार्नेलिया कलकत्ता हाईकोर्ट में बैरिस्टर बन कानून की प्रैक्टिस करने वाली पहली महिला बनीं।
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