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FIDE Women’s Final: शतरंज की ‘शेरनियों’ की कहानी, जानें कैसे कोनेरू हम्पी और दिव्या देशमुख बनीं भारत की शान

Sat, 26 Jul 2025 04:31 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

FIDE Womens World Cup 2025 Final: जीत किसी की भी हो लेकिन भारत की इन दोनों शतरंज की महारथियों ने साबित कर दिया कि जब जब लड़कियों को सही दिशा और सहयोग मिले, तो वे वैश्विक मंच पर भारत का झंडा बुलंद कर सकती हैं। आइए जानते हैं कोनेरू हम्पी और दिव्या देशमुख के बारे में। 
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फिडे महिला वर्ल्ड कप में शतरंज की दो भारतीय महिला खिलाड़ी - फोटो : Instagram
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विस्तार
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FIDE Womens World Cup 2025 Final: भारत की दो शतरंज खिलाड़ी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का परचम लहरा रही हैं। खास बात ये है कि शतरज के वर्ल्ड कप में एक भारतीय खिलाड़ी ही इस बार विजेता होगा। फिडे महिला विश्व कप फाइनल 2025 में भारत की दो ‘पावरहाउस’ ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी और युवा चेस चैंपियन दिव्या देशमुख आमने-सामने हैं। हम्पी दशकों से भारत की शतरंज क्वीन रही हैं तो वहीं उनकी टक्कर युवा जोश और तेजी से उभरती दिव्या से होना है। इस बार भारत के लिए फिडे महिला विश्व कप का फाइनल मुकाबला बेहद खास है, क्योंकि यह एक ऐसा मुकाबला है जहां अनुभव और युवा जोश आमने सामने होगा। हम्पी की स्थिरता और दिव्या की तेज चालें दोनों ही दर्शकों को रोमांचित करती हैं। जीत किसी की भी हो लेकिन भारत की इन दोनों शतरंज की महारथियों ने साबित कर दिया कि जब जब लड़कियों को सही दिशा और सहयोग मिले, तो वे वैश्विक मंच पर भारत का झंडा बुलंद कर सकती हैं। आइए जानते हैं कोनेरू हम्पी और दिव्या देशमुख के बारे में। 

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कोनेरू हम्पी कौन हैं?

कोनेरू हम्पी भारत की पहली महिला ग्रैंडमास्टर हैं। उनका जन्म आंध्र प्रदेश में 31 मार्च 1987 को हुआ था। कोनेरू हम्पी की सफलता उनकी पिता की कोचिंग, कड़ी मेहनत और मानसिक दृढ़ता का नतीजा है। 

वर्ष 2002 में महज 15 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बनने वाली वह पहली भारतीय महिला हैं। साल 2003 में हम्पी को अर्जुन पुरस्कार और 2007 में पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है। 2007 में एलीट 2600 एलो रेटिंग मार्क को पार करने वाली हम्पी विश्व की दूसरी महिला खिलाड़ी हैं। वहीं 2019 में हुए फिडे महिला ग्रांड प्रिक्स की भी विजेता रह चुकी हैं। आॅनलाइन फिडे महिला रेपिड चैंपियनशिप 2020 को कोनेरू हम्पी ने जीता था। साल 2024 में आयोजित हुए एशियन गेम्स में हम्पी ने भारत को गोल्ड दिलाया। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। पिछले कई वर्षों में उनका जज्बा और दृढ़ संकल्प जरा भी कम नहीं हुआ है। 
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FIDE Womens WC: फिडे महिला विश्व कप में पहली बार कोई भारतीय  बनेगा विजेता, हम्पी की दिव्या से टक्कर



दिव्या देशमुख की उपलब्धि

महाराष्ट्रन के नागपुर में 9 दिसंबर 2005 को जन्मी दिव्या देशमुख ने महज 8 साल की उम्र में दिव्या देशमुख ने अपनी पहला विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीता। साल 2014 में वह युवा अंडर 10 विश्व चैंपियन बनीं। उसके बाद अखिल भारतीय शतरंज चैंपियशिप 2002 की विजेता रहीं। एशियन वुमन चेस चैंपियन 2023 उनके नाम रहा और विश्व जूनियर चैंपियनशिप 2024 में कांस्य पदक हासिल किया। वर्तमान में उनके पास 2024 के प्रतिष्ठित विश्व जूनियर अंडर 20 चैंपियन खिताब सहित तीन विश्व खिताब हैं। फिडे महिला विश्व कप के फाइनल में जगह बनाकर दिव्या देशमुख ने इतिहास रच दिया। दिव्या अपने गेमप्लान और आत्मविश्वास के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने यह दिखा दिया है कि शतरंज में उम्र मायने नहीं रखती, जुनून और प्रतिबद्धता ही असली ताकत होती है।

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