मिस चंद्रबली दत्ता अपने बारे में बताती हैं कि उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई कोलकाता से पूरी की है। उन्हें बचपन से ही जीव विज्ञान और गणित जैसे विषय पसंद थे। हालांकि उन्होंने कम्प्यूटर साइंस की भी पढ़ाई की थी और भारत में एसोसिएट सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम किया है। लेकिन उन्हें ये फील्ड पसंद नहीं आया और वो फिर से बायोटेक के क्षेत्र में लौट आईं। दत्ता बताती हैं कि उनकी बचपन के दोस्त नॉटिंघम में पढ़ाई करते हैं और उन्होंने ही मुझे यूके में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। यूनाइटेड किंगडम महिलाओं की समानता के मामले में काफी बेहतर है। इसलिए मैंने यहां से बायोटेक में मास्टर्स की डिग्री लेने का निर्णय किया।
मिस दत्ता बताती हैं कि अपने देश को छोड़कर यहां आना थोड़ा मुश्किल भरा था। क्योंकि मेरी मां नहीं चाहतीं थी कि उनकी इकलौती संतान पढ़ाई के लिए दूसरे देश जाए लेकिन मेरे पिता हमेशा से मेरे साथ थे और चाहते थे कि मैं अपने सपनों को पूरा करूं। कठिन मेहनत और लगन से उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में नौकरी पाई और अब वो इस सबसे ज्यादा चर्चित कोरोना वैक्सीन के प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं।