समाज में अक्सर कुछ विषय इतने संवेदनशील माने जाते हैं कि उनके बारे में खुलकर बात करने से लोग कतराते हैं। लेकिन इसी समाज में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो चुप्पियों को तोड़ते है। छत्तीसगढ़ की बिलासपुर की रहने वाली अंकिता पांडेय शुक्ला एक ऐसा ही नाम हैं जिन्होंने बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता को अपना जीवन मिशन बना लिया है। यह पिछले दस वर्षों से बच्चों को "अच्छे और बुरे स्पर्श" के बारे में शिक्षित कर रही हैं। अंकिता कहती हैं, "यह एक ऐसा विषय है, जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, लेकिन इसका बच्चों के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गहरा असर होता है।"
अंकिता बच्चों को कराती हैं 'अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान'
अंकिता ने जब अपने आस-पास के बच्चों की चुप्पी, डर और असहजता महसूस किया तब उन्हें एहसास हुआ कि कितने मासूम बच्चे अपनी तकलीफ को पहचान ही नहीं पाते या फिर बोल नहीं पाते। इसी सोच से प्रेरित होकर उन्होंने बच्चों को यौन शोषण, गलत व्यवहार और स्पर्श की पहचान कराने की मुहिम शुरू की। अकिला बताती है, "मेरी मां सुर्यकांता पाण्डेय शिक्षिका हैं, पिता भेचेंद्र पाण्डेय मूर्तिकार है, इसलिए हमेशा घर में सकारात्मक माहौल रहा। इसी के चलते मैंने मास्टर ऑफ सोशल वर्क किया और समाज में बदलाव लाने में लग गई।"
अंकिता स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, ग्रामीण इलाकों और झुग्गी बस्तियों में जाकर छोटे-छोटे बच्चों को उनकी उम्र के अनुकूल भाषा और गतिविधियों के माध्यम से सिखाती हैं कि कौन-सा स्पर्श 'अच्छा' है और कौन-सा 'बुरा'। साथ ही अंकिता बच्चों को यह भी बताती है कि यदि कोई उन्हें गलत ढंग से छूता है या असहज करता है, तो वे क्या करें।
अंकिता कहती है, बच्चों को सिर्फ जानकारी देना ही काफी नहीं होता, उन्हें भयमुक्त माहौल देना भी उतना ही जरूरी होता है। अंकिता का लक्ष्य है कि हर बच्चा खुलकर बोल सके,अपनी समस्या बता सके और मदद मांग सके।
शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी प्रशिक्षण
इसी उद्देश्य से उन्होंने आत्मरक्षा प्रशिक्षण, गुड टय-बैड टच पर कार्यशाला और कहानी तथा खेल के माध्यम से संवाद सत्र आयोजित किए। वह शिक्षकों और माता-पिता को भी प्रशिक्षण देती हैं कि वे कैसे अपने बच्चों से खुलकर बातचीत करें, उन पर भरोसा करें और उन्हें ऐसा माहौल दे जहां वे असुरक्षा के बजाय सुरक्षित महसूस करें।
बदलते डिजिटल युग में किशोरों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना भी अंकिता जरूरी मानती है। इसके लिए वह युवाओं को इंटरनेट सुरक्षा, सोशल मीडिया पर सुरक्षित व्यवहार और साइबर बुलिंग से निपटने के उपाय भी बताती हैं, साथ ही नशा मुक्त और मिक्षामुक्त प्रदेश की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रही है और जन जागरण अभियान चलाकर समाज को सकारात्मक दिशा की ओर मोड़ रही है।
अंकिता पाण्डेय शुक्ला आज एक मां जैसी संरक्षक, एक शिक्षक जैसी मार्गदर्शक और एक योद्धा जैसी रक्षक बन चुकी है, उन बच्चों के लिए, जो अपनी आवाज नहीं उठा पाते। अंकिता ने भिक्षावृत्ति, यौन शोषण, बाल विवाह और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों को अपना उद्देश्य बनाकर मार्मिक चेतना' नाम से एक संस्था भी स्थापित की, जिसमें उनके पति अनुभव शुक्ला ने पूरा साथ दिया।
अंकिता के प्रयासों को देश और राज्य स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड भी शामिल है। उन्हें छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला के रूप में राष्ट्रीय युवा पुरस्कार (2019-20), राज्यपाल द्वारा नारी रत्न सम्मान, नारी शक्ति सम्मान और बिलासपुर पुलिस द्वारा विशिष्ट सामाजिक योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है।