एक समय था, जब बिहार के गांवों में लड़कियों की कम उम्र में ही शादी करके उनके सिर पर जिम्मेदारियों का बोझ डाल दिया जाता था। शिक्षा और सामाजिक विकास से दूर बच्चियां बाल विवाह के चक्कर में फंसकर कम उम्र से ही घर संभालने लग जाती थी। इसी परंपरा के खिलाफ बिहार की शिक्षिका चंदना दत्त मे मुहिम छेड़ी। बेटियों को पढ़ाने के लिए माता-पिता को जागरूक करना शुरू कर दिया। उन्हीं की मेहनत का नतीजा है कि आज जिस स्कूल में वह पढ़ाती हैं, वहां के कुल बच्चों में 60 फीसदी लड़कियां हैं। चंदना दत्त के शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए साल 2021 के नेशनल टीचर अवार्ड के लिए उनका चयन हुआ है। शिक्षक दिवस के अवसर पर देश के 43 शिक्षकों के साथ राष्ट्रपति, चंदना दत्त को भी सम्मानित करेंगे।
करीब 17 साल से शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहीं चंदना दत्त ने शुरुआत में देखा कि लोग बेटियों को पढ़ाने के लिए स्कूल नहीं भेजते हैं। यहीं से उन्होंने निर्णय लिया कि अब वह माता-पिता के साथ बच्चियों को शिक्षा का महत्व समझाते हुए उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी। बिहार के मधुबनी जिले में जब साल 2005 में चंदना ने पढ़ाना शुरू किया तो उस समय स्कूल में लड़कियों की संख्या गिनी चुनी होती थी। इसे चंदना दत्त का प्रयास ही कहें कि अब हालात बदल गए है। अब स्कूल में 850 से अधिक छात्र पढ़ते हैं जिनमें से 500 से अधिक लड़कियां शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।