कोरोना काल में बहुत से लोग और डॉक्टर दिन रात मेहनत कर कोरोना संक्रमित लोगों की सेवा और इलाज कर रहे हैं। लेकिन इस बार हम बात कर रहे हैं पूर्वोत्तर भारत की पहली महिला ट्रांसजेडर डॉक्टर की, जो दिनरात मेहनत कर कोरोना संक्रमित मरीजों की सेवा कर रही है। दरअसल, ये बात इसलिए भी खास है क्योंकि हमारे समाज में अभी भी ट्रांसजेडर को बराबरी का हक नहीं मिला है। उन्हें पढ़ने लिखने से लेकर आम इंसानों जैसा काम करने में भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ट्रांसजेडर डॉक्टर बेओंसी लेश्राम की कहानी एक मिसाल है।