कौन हैं शीतल देवी
शीतल देवी जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ की रहने वाली हैं। 16 वर्षीय शीतल ने चीन के हांगझाऊ में हुए एशियाई पैरा खेलों में दो स्वर्ण समेत तीन मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह एक ही संस्करण में दो स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी हैं।
शीतल देवी का जीवन परिचय
शीतल देवी का जन्म जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के दूरदराज गांव लोई धार में एक गरीब परिवार में हुआ था। शीतल के पिता किसानी करते हैं और मां घर में बकरियां संभालती हैं।
शीतल का संघर्ष और करियर
गरीब परिवार की इस बेटी का जीवन जन्म से ही संघर्षपूर्ण रहा। 16 साल की शीतल के जन्म से ही दो हाथ नहीं थे। शीतल फोकोमेलिया नाम की बीमारी से जन्मजात पीड़ित है। इस बीमारी में अंग पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते हैं। हालांकि बाजू न होना शीतल के लिए दिव्यांगता अभिशाप नहीं बन पाया।
उन्होंने तीरंदाजी करना शुरु की। शीतल बिना दोनों बाजु के सिर्फ छाती के सहारे दांतों और पैर से तीरंदाजी का अभ्यास करतीं। ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा करने वाली बिना हाथों की पहली तीरंदाज भी हैं।
शीतल देवी की उपलब्धि
ट्रेनिंग के शुरुआती दिनों में वह धनुष तक नहीं उठा पाती थीं लेकिन उन्होंने दाएं पैर से धनुष उठाने का अभ्यास किया और दो साल की कड़ी ट्रेनिंग के बदौलत जीत का परचम लहराया। 2021 में बतौर तीरंदाज करियर की शुरुआत करने वाली शीतल ने पहली बार किश्तवाड़ में भारतीय सेना की एक युवा प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। ट्रेनिंग के दौरान उनके लिए एक विशेष धनुष तैयार कराया गया, ताकि वह पैर से आसानी से धनुष उठा सकें और कंधे से तीर को खींच सकें। उनके कोच अभिलाषा चौधरी और कुलदीप वेदवान हैं।
आनंद महिंद्रा ने की तारीफ
पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में शीतल ने दो गोल्ड और एक सिल्वर हासिल किया। उनके शानदार प्रदर्शन को देख आनंद महिंद्रा ने शीतल से अपनी कंपनी की कोई भी मनचाही कार लेने की पेशकश की। शीतल के लिए एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा, मैं अपने जीवन की छोटी मोटी समस्याओं पर शिकायत नहीं करूंगा। शीतल आप सभी के लिए एक शिक्षक हैं। कृपया हमारी रेंज में से कोई भी कार अपने लिए चुनें और हम इसे आपकी सुविधा के अनुसार कस्टमाइज कर आपको तोहफे में देंगे।'