एशियाई खेलों में भारत के खिलाड़ियों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। अब तक कई भारतीय खिलाड़ी स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीत चुके हैं। इस सूची में भारत की बेटियों का नाम भी शुमार है। देश की बेटियां अपने माता पिता के साथ ही भारत का मान भी एशियाड में बढ़ा रही हैं। इस दौरान एशियाई खेल 2023 में चर्चा दो जुड़वा बहनों की हो रही है। ये देश के इतिहास में पहली बार है, जब जुड़वा बहनों ने एक साथ एशियाई खेलों में प्रतिभाग किया है। दोनों ही बहनें देश का मान बढ़ा रही हैं। आइए जानते हैं इतिहास रचने वाली भारत की जुड़वा एथलीट बहनों के बारे में, जिनके संघर्ष की कहानी जान उनकी उपलब्धियों पर गर्व महसूस करेंगे और सपने साकार करने के लिए डटकर मुश्किलों का सामना करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
कौन हैं एशियाई खेलों में शामिल जुड़वा बहनें
एशियाई खेलों में विद्या रामराज और नित्या रामराज ने भाग लिया है। विद्या और नित्या भारत की पहली जुड़वा बहनें हैं, जो एक साथ एशियाई खेलों में शामिल हुई हैं। नित्या बहन विद्या से एक मिनट बड़ी हैं।
जुड़वा बहनों का संघर्ष
नित्या और विद्या का जन्म कोयंबटूर में हुआ है। उनके पिता रामराज ऑटो रिक्शा चालक और मां मीना गृहणी हैं। कोयंबटूर की गलियों में ऑटो रिक्शा चलाने वाले रामराज ने अपनी बेटियों के सपने को साकार करने के लिए उनका हर कदम पर साथ दिया।
एक स्थानीय सरकारी स्कूल में पढ़ाई के दौरान विद्या ने वर्ष 2014 में दौड़ में पदक जीता लेकिन बतौर एथलीट करियर बनाना आसान नहीं था। कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि कोच नेहपाल सिंह राठौड़ की मदद से उन्हें नई राह मिली। दोनों ने कड़ी मेहनत की और 2021 में फेडरेशन कप में 400 मीटर की दौड़ जीतकर विद्या ने स्वर्ण पदक जीता।
विद्या की उपलब्धि
विद्या रामराज ने फेडरेशन कप 2021 में स्वर्ण पदक हासिल किया। ओपन नेशनल में डबल हासिल किया। खेल कोटे में उन्हें रेलवे में नौकरी मिल गई। पलक्कड़ डिवीजन के वरिष्ठ क्लर्क का पद मिला।
नित्या रामराज की उपलब्धि
नित्या रामराज का 400 मीटर फ्लैट रेस पसंदीदा है, लेकिन उन्होंने 400 मीटर हर्डल्स को चुना। भारतीय एथलेटिक्स महासंघ द्वारा निर्धारित 400 मीटर क्वालिफाइंग सेट को भी उन्होंने पूरा किया लेकिन सूची में उनका नाम नहीं था। वर्तमान में नित्या चेन्नई में आयकर विभाग में नौकरी करती हैं और मल्टी टास्किंग स्टाफ के रूप में चेन्नई में तैनात हैं।