जीवन में चुनौतियों और कठिनाईयों से ना घबराने वाले हमेशा ही लोगों की प्रेरणा बनकर उभरते हैं। ऐसी ही कहानी है गुजरात की अंकिता की। जो दिव्यांग होने के बाद भी ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का पेट भर रही हैं। अंकिता को बचपन में ही पोलियो हो गया। जिसके बाद उनका दाहिना पैर खराब हो गया। लेकिन उनके माता-पिता ने अंकिता को हमेशा प्रोत्साहिता किया और उनकी पढ़ाई पूरी करने में मदद की।
अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन करने के बाद वो साल 2009 में अहदाबाद आ गईं। नौकरी की तलाश में उन्होंने कई जगह इंटरव्यू दिए। लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। संघर्ष के इस दौरा में पिता को कैंसर हो गया और परिवार को संभालने की जिम्मेदारी अंकिता के कंधों पर आ गई। ऐसे में 2019 में अंकिता ने यहां-वहां भटकने की बजाय अपना काम शुरू करने की सोची। इस बीच अपने दोस्त से ऑटो चलाना सीखा। जो खुद भी दिव्यांग हैं और कस्टमाइज्ड ऑटो चलाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने ही अंकिता को कस्टमाइज्ड ऑटो खरीदने में वित्तीय मदद की। अंकिता सुबह दस बजे से लेकर रात आठ बजे तक रिक्शा चलाती हैं। दिनभर ऑटो ड्राईविंग से उन्हें 25 हजार रुपये की महीनाभर में कमाई हो जाती है। अंकिता की कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा की तरह है जो अपनी लाचारी की वजह से कुछ करने का साहस नहीं जुटा पातीं।