लड़कियों को प्राय: इस उम्र में नियमित रूप से रक्त का स्त्राव होता है। हालांकि नियमित मासिक धर्म की वजह से कई सारी परेशानियां भी हो सकती है। लेकिन ये कुछ ज्यादा चिंता का विषय नही होता है। लेकिन अगर इस उम्र में पीरियड्स कई दिनों तक आते हैं और ये लगातार तीन महीने से ज्यादा हो तो फौरन किसी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है। जिससे कि भविष्य में इस तरह के कष्ट से बचा जा सके। किशोरावस्था के दौरान पीरियड्स का अनियमित होना चिंता का विषय काफी हद तक नही होता है।
बीसवे उम्र में प्रवेश करने के साथ ही हार्मोंस स्थिर होने लगते हैं और मासिक चक्र का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। लेकिन कई बार अगर देरी होती है तो चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि इस उम्र में तनाव जिसका कारण पढ़ाई, रिलेशनशिप या ब्रेकअप वगैरह होते हैं, की वजह से ओवेलुएशन नही होता और पीरियड्स में देरी हो जाती है। लेकिन ये क्रम लगातार चले तो हार्मोनस गड़बड़ी की भी समस्या हो सकती है।
30 की उम्र में पीरियड्स
उम्र के इस पड़ाव पर महिलाओं में पीरियड्स नियमित रूप से होने लगते हैं। वहीं कुछ महिलाओं में स्राव अधिक और कम भी हो सकता है. इस उम्र में एंडोमेट्रिओसिस और फाइब्रॉएड भी सामान्य रूप से देखा जाता है। ज्यादातर महिलाएं इस उम्र में मां बनती है जो इनके माहवारी चक्र को पूरी तरह से बदल देता है। स्तनपान कराने से भी इस पर प्रभाव पड़ता है। ज्यादातर वो महिलाएं जो स्तनपान कराती हैं उन्हें पीरियड्स के नियमित होने में समय लगता है।
वहीं 40 की उम्र में कदम रखने के साथ ही महिलाओं के मासिक धर्म में एक बार फिर अनियमितता की शिकायत होने लगती है। इसका कारण है कि पीरियड्स अपने खत्म होने के दौर पर होता है। इस समय दिखाई देने वाले लक्षणों को ्प्री मेनोपॉज लक्षण कह सकते हैं। जिसकी वजह से चिड़चिड़ापन, अधिक गर्मी या सर्दी लगना या फिर पसीना अधिक निकलने की शिकायत होती है। ऐसे में किसी अच्छे डॉक्टर से मिलना स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा।